भीलवाड़ा

राजस्थान में वन भूमि के रिकॉर्ड का खुलासा: कहीं 99.63% वन भूमि दर्ज तो कहीं सिर्फ 33%, सामने आया बड़ा अंतर

राजस्थान में 3.82 लाख हेक्टेयर वन भूमि अब भी राजस्व रिकॉर्ड से बाहर है। डूंगरपुर में 67% वन भूमि का अमलदरामद बाकी है, जबकि भीलवाड़ा में 99.63% रिकॉर्ड दुरुस्त हो चुका है।
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अनिल सिंह चौहान

भीलवाड़ा. राजस्थान में वन संरक्षण और वन भूमि के रिकॉर्ड दुरुस्तीकरण (अमलदरामद) को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 33.02 लाख हेक्टेयर वन भूमि में से 29.19 लाख हेक्टेयर (88.42%) भूमि पर ही राजस्व रिकॉर्ड में अमलदरामद हो पाया है। राज्य में आज भी 3.82 लाख हेक्टेयर (11.58%) वन भूमि ऐसी है, जिसका आधिकारिक इंद्राज नहीं हो सका है। कागजी रिकॉर्ड में दर्ज न होने के कारण सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण और अवैध कब्जों की तलवार लटकी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार ब्यावर, डीडवाना-कुचामन, अनूपगढ़, डीग, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, फलोदी, बालोतरा और सलूंबर जैसे नवगठित जिलों की वन भूमि का पुनर्गठन व राजस्व सीमांकन प्रक्रियाधीन होने से भी कई जिलों में अमलदरामद की रफ्तार पर असर पड़ा है।

वन भूमि का गणित

33,02,032.40 हेक्टेयर : कुल वन भूमि

29,19,819.81 हेक्टेयर : अमलदरामदशुदा भूमि (88.42%)

3,82,212.59 हेक्टेयर : अमलदरामद से शेष भूमि (11.58%)

टॉप 5 जिले (%)

  • भीलवाड़ा : 99.63
  • झालावाड़ : 99.16
  • दौसा : 98.89
  • झुंझुनूं : 98.40
  • जैसलमेर : 98.40

बॉटम 5 जिले (%)

  • डूंगरपुर : 66.89
  • राजसमंद : 32.44
  • उदयपुर : 27.43
  • चित्तौड़गढ़ : 24.69
  • जोधपुर : 21.07

डूंगरपुर सबसे फिसड्डी, उदयपुर में सबसे बड़ी अनदेखी

डेटा के विश्लेषण से सामने आया है कि वन भूमि दर्ज करने के मामले में जनजातीय बहुल जिला डूंगरपुर सबसे पीछे है। डूंगरपुर में कुल 69,330 हेक्टेयर वन भूमि में से महज 33.11% (22,957 हेक्टेयर) पर ही अमलदरामद हुआ है, जबकि 66.89% (46,372 हेक्टेयर) भूमि अब भी राजस्व रिकॉर्ड से बाहर है। वहीं, क्षेत्रफल के लिहाज से उदयपुर जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है। उदयपुर में 1,14,221 हेक्टेयर (27.43%) वन भूमि का अमलदरामद बकाया है। इसके अलावा राजसमंद (32.44% बकाया) और चित्तौड़गढ़ (24.69% बकाया) जो काम हुआ है वह भी चिंताजनक है।

क्यों जरूरी है...

जब तक वन भूमि के सभी खसरों का अमलदरामद नहीं होता, तब तक राजस्व रिकॉर्ड और फॉरेस्ट मैप का सटीक मिलान नहीं हो पाता। इससे वन भूमि पर कब्जों को हटाने, हरित योजनाओं को लागू करने में देरी होती है।

भीलवाड़ा का कीर्तिमान

दूसरी ओर, भीलवाड़ा जिले ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जहां कुल 77,925 हेक्टेयर में से 99.63% (77,636 हेक्टेयर) वन भूमि का अमलदरामद पूरा कर लिया गया है।

Updated on:
07 Oct 2026 11:00 am
Published on:
07 Oct 2026 11:00 am
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