राजस्थान में महंत बाबूगिरी को निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया। हरिद्वार से आए संतों ने विधि-विधान से उनका पट्टाभिषेक किया। इस अवसर पर सांसद और विधायक सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
Mahant Babugiri Mahamandaleshwar: भीलवाड़ा शहर के संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरी का सोमवार को महामंडलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक हुआ। अब वे निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर बाबूगिरी के नाम से जाने जाएंगे।
यह समारोह आजादनगर स्थित मेडिसिटी ग्राउंड में शिव महापुराण कथा पंडाल के मंच पर हुआ। पंचायती निरंजनी अखाड़ा मायापुर हरिद्वार के सचिव और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी के सानिध्य में संपन्न हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता चारधाम मंदिर उज्जैन के महामंडलेश्वर स्वामी शांतिस्वरूपानंद गिरी ने की।
सांसद दामोदर अग्रवाल और विधायक अशोक कोठारी भी मंच पर मौजूद रहे। पंडित अशोक व्यास के निर्देशन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देहरादून से आए महामंडलेश्वर महेशानंद गिरी ने पट्टाभिषेक कराया।
पट्टाभिषेक के बाद निरंजनी अखाड़े सहित अन्य संतों और भक्तों ने उन्हें चादर ओढ़ाकर अभिनंदन किया। इस अवसर पर अग्रेसन भवन में विशाल भंडारे का भी आयोजन हुआ। इसमें दो सौ से अधिक संत शामिल हुए। प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा भी कुछ देर भंडारे में मौजूद रहे।
महंत रवींद्र पुरी महाराज ने सनातन धर्म, राजनीति और गौ सेवा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर अपने विचार साझा किए। संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबू गिरी को 'महामंडलेश्वर' की उपाधि प्रदान करने पहुंचे महंत पुरी ने वर्तमान सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर सराहना की।
महंत रवींद्र पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत का "पहला सच्चा हिंदू प्रधानमंत्री" बताया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले संत और ब्राह्मण अपनी पहचान (शिखा-सूत्र) छिपाने को मजबूर थे, लेकिन आज भगवा और सनातन परंपरा का गौरव पूरे विश्व में दिख रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि "योगी जी का भविष्य प्रधानमंत्री मोदी के हाथ में है" और वे उनके सबसे प्रिय पात्र हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि संतों का आशीर्वाद उसी सरकार के साथ है जो सनातन धर्म और राष्ट्रहित की बात करती है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के संदर्भ में उठ रहे विवादों पर उन्होंने उदार रुख अपनाया। उन्होंने शंकराचार्य को एक विद्वान संत बताते हुए कहा कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन लक्ष्य एक ही है, गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही गौ सेवा का यह संकल्प सिद्ध होगा।
महंत पुरी ने प्रयागराज महाकुंभ की सफलता का श्रेय मोदी-योगी की जोड़ी को दिया और आगामी उज्जैन महाकुंभ के लिए विश्वभर के सनातनियों को आमंत्रित किया। साथ ही, उन्होंने अमरनाथ यात्रा के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि इसका संचालन निरंजनी अखाड़ा ही करता है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे भारी संख्या में इस यात्रा का हिस्सा बनें और इसे दिव्य व भव्य बनाएं।