स्वच्छता के प्रति ग्रामीणों का जज्बा देखना है तो आसीन्द क्षेत्र के जेतपुरा में आइए
भीलवाड़ा।
स्वच्छता के प्रति ग्रामीणों का जज्बा देखना है तो आसीन्द क्षेत्र के जेतपुरा में आइए। यहां के लोग शौचालय को इज्जत घर मानते है। अपने घर की बहु बेटियां बाहर नहीं जाए, इसके लिए अपनी जरूरतों को समाप्त कर शौचालय बनाने में रूचि दिखाई। इस गांव के लोगों ने दूसरों को सीख देने के लिए शौचालयों पर इज्जत घर तक लिखवा दिया है।
अक्सर शौचालय के नाम से लोग कन्नी काट लेते हैं, लेकिन जिले की इस ग्राम पंचायत ने इसे इज्जत घर का नाम दिया तो लोगों ने शुरूआत में इसका मजाक उड़ाया लेकिन अब पूरा गांव खुले में शौच मुक्त हुआ। पूरे जिले को एक नया संदेश दे रहा है।
ग्रामीण मानते है कि हमारे घर में सौ-सौ बीघा खेती है और हमारी बहु बेटिया शौच के लिए बाहर जाती है तो हमे अच्छा नहीं लगता है। इसलिए शौचालय को इज्जत घर देकर काम को प्रमुखता से किया। पूरे गांव को खुले में शौचमुक्त कर दिया है। साथ ही गांव के हर घर के शौचालय के बाहर इज्जत घर लिखवाया गया है।
घर कच्चा लेकिन शौचालय पक्का
जेतपुरा में सफाई के प्रति जज्बा गजब है। इसी गांव के काना गाडरी का शौचालय पक्का है, लेकिन घर कच्चा है। कान्हा गाडरी ने घर में शौचालय निर्माण के लिए बकरी और अन्य समान बेच दिया। गांव में ऐसे कई परिवार है जिनके पास रहने को पक्का मकान तक नहीं है। लेकिन पक्का शौचालय है।
गांव की बेटियों की इज्जत हमारी इज्जत
&हमारे गांव की बहु-बेटी खुले में शौच के लिए जाए यह कतई अच्छा संदेश नहीं था। इसके लिए शौचलय के बाहर इज्जत घर लिखवाया गया। हमने अपने जेतपुरा गांव के हर शौचलय के बाहर इज्जत घर लिखा है। गांव की बेटियों की इज्जत हमारी इज्जत है।
सांवरलाल गुर्जर, सरपंच, जेतपुरा
हर शौचालय पर लिखेंगेे इज्जत घर
आसीन्द क्षेत्र के कई पंचायतों में शौचालयों के बाहर इज्जत घर लिखवाने का काम चल रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण है कि बेटिया खुले में शौच न जाए। बेटियों की इज्जत हमारी इज्जत है। इसके लिए किसी से राशि भी नहीं ली जा रही है।
लक्ष्मीदेवी साहू, प्रधान, आसींद
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