
Sultan Shah Baori dispute Shahpura Bhilwara: शाहपुरा शहर के पुराना बस स्टैंड स्थित सुल्तान शाह की बावड़ी से जुड़े करीब 18 साल पुराने कानूनी विवाद का आखिरकार पटाक्षेप हो गया है। राजस्थान वक्फ अधिकरण (ट्रिब्यूनल) के एक अहम फैसले के बाद, जिला मजिस्ट्रेट भीलवाड़ा के निर्देशों की अनुपालना में प्रशासन ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। शाहपुरा नगरपालिका प्रशासन ने उपखंड और पुलिस महकमे के साथ मिलकर खसरा संख्या 2354 की 1 बीघा 10 बिस्वा बेशकीमती सरकारी भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करा लिया है। संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्र में तीन बुलडोजर और लोडर्स की मदद से अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया गया।
अदालत के फैसले के बाद प्रशासन ने सरकारी जमीन को कब्जे में लेने की रूपरेखा तैयार की। इस बेशकीमती जमीन पर अतिक्रमणकारियों ने अवैध रूप से गोदाम, केबिन और घुमटियां खड़ी कर रखी थीं। गुरुवार सुबह एक दर्जन ट्रैक्टर, एक लोडर और तीन बुलडोजर के साथ पहुंचे दस्ते ने अवैध निर्माणों को ढहा दिया। कार्रवाई के दायरे में आ रही एक मजार को भी पूरी संवेदनशीलता के साथ वहां से हटा दिया गया। अंत में पालिका ने मुक्त करवाई सरकारी भूमि पर खंभे गाड़कर तारबंदी की।
कार्रवाई से पूर्व शहर काजी शराफत अली और सदर हमीद खां की अगुवाई में मुस्लिम समाज के लोगों ने विरोध दर्ज कराया। डिप्टी ओमप्रकाश विश्नोई, थानाधिकारी सुरेश चंद्र ने समझाइश कर लोगों को प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर जाने से रोका। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल उपखंड अधिकारी सुनील मीणा, एसएसपी राजेश आर्य के पास पहुंचा।
प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से मिलकर आरोप लगाया कि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट की गाइडलाइंस की पालना नहीं की और पक्ष सुनने का 15 दिन का समय दिए बिना ही 24 घंटे में कार्रवाई कर दी। हालांकि, अधिकारियों ने कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए समझाइश की और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।
मामला अत्यधिक संवेदनशील होने के कारण गुरुवार को पूरे कस्बे में अघोषित लॉकडाउन जैसी स्थिति नजर आई। सुरक्षा के लिहाज से पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बाजार पूरी तरह बंद रहे, सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और चाय की थड़ियां तक नहीं खुलीं। अतिक्रमण क्षेत्र की ओर आने वाले सभी रास्तों को बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया।
सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके पर ड्रोन कैमरों से पैनी नजर रखी गई। साथ ही आसपास के मकानों की छतों पर हथियारबंद पुलिस जवान तैनात रहे। मौके पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश आर्य, उपखंड अधिकारी सुनील मीणा, तहसीलदार भींवराव परिहार सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा।
साल 2008 में शाहपुरा निवासी सिद्दीक खां, इशाक मोहम्मद और मजीद खां ने नगरपालिका, राज्य सरकार (जिला कलक्टर), उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ को पक्षकार बनाते हुए वक्फ अधिकरण में एक वाद दायर किया था। वादी पक्ष का दावा था कि इस स्थान पर मौजूद 1 बीघा 10 बिस्वा भूमि वक्फ संपत्ति है। लगभग 18 वर्षों तक चली लंबी कानूनी लड़ाई और गहन सुनवाई के बाद, अधिकरण ने इस दावे को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सुल्तान शाह की बावड़ी का वास्तविक क्षेत्रफल मात्र 9 गुणा 22 फीट (कुल 198 वर्ग फीट) ही है। इस चिन्हित हिस्से के अलावा शेष बची पूरी भूमि पर वक्फ का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने डिक्री आदेश में यह भी साफ किया कि इस 198 वर्ग फीट की वक्फ संपत्ति के उपयोग और धार्मिक कार्यों में कोई बाधा न आए, तथा बावड़ी के रास्ते को बाधित न किया जाए।
नगरपालिका की जमीन से अतिक्रमण हटाने की यह बड़ी कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर की गई है। मौके पर धार्मिक स्थल होने के कारण सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। एहतियात के तौर पर स्थानीय पुलिस के अलावा जिले के 17 थानों से करीब 200 पुलिसकर्मियों का अतिरिक्त जाप्ता तैनात किया गया था। शाहपुरा की जनता के सहयोग से पूरी कार्रवाई कानून व्यवस्था और शांति के साथ संपन्न हुई।
-राजेश आर्य, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, शाहपुरा