
Bhind Mahoba Railway Line Project Survey: मध्यप्रदेश के भिण्ड से लहार, कोंच होते हुए महोबा तक प्रस्तावित 217 किलोमीटर लंबी रेल लाइन परियोजना पिछले एक दशक से अधिक समय से सरकारी फाइलों में अटकी हुई है। वर्ष 2015 के रेल बजट में शामिल होने और दो-दो बार सर्वे पूरा होने के बावजूद परियोजना को अब तक रेल मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिल सकी है। चंबल और बुंदेलखंड को जोड़ने वाली इस महत्त्वाकांक्षी योजना पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी, जिससे क्षेत्रवासियों को आज भी रेल कनेक्टिविटी का इंतजार है।
बता दें वर्ष 2015 के रेल बजट में भिण्ड-लहार-महोबा रेलवे लाइन को शामिल किया गया था। इस पर वर्ष 2012 में सर्वे कार्य भी हुआ था, लेकिन राजनैतिक उदासीनता के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई और खटाई में पड़ गई। जबकि विभाग ने 1748 करोड़ रुपए का बजट भी प्रस्तावित किया था। अब वर्ष 2025-26 में भिण्ड रेलवे स्टेशन से लहार, कोंच होते हुए महोबा तक लगभग 217 किलोमीटर लंबी लाइन का दोबारा सर्वे किया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परियोजना की रिपोर्ट तैयार कर मंत्रालय को भेजी गई है, जिस पर अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है।
स्वीकृति मिलने के बाद ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इस रेल लाइन के बिछने से चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र का सीधा जुड़ाव होगा, जिससे बड़ी आबादी को सीधा लाभ मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। हालांकि, परियोजना पर कार्य कब तक शुरू होगा, यह कह पाना अभी मुश्किल है। हाल ही में हुई रेलवे बोर्ड की बैठक में सांसद संध्या राय ने भी इस मुद्दे को उठाया है। एक बार फिर लहार के रास्ते उत्तर प्रदेश को जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सबसे पहले पूर्व सांसद डॉ भागीरथ प्रसाद ने इस योजना को रेलवे की कैबिनेट बैठक में उठाया था। योजना को स्वीकृति भी मिली और बजट स्वीकृत भी किया गया, लेकिन रेलवे ने भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रस्ताव खारिज कर दिया। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ने भी प्रयास किए, लेकिन पिछले दस साल से योजना को भुला दिया गया है। एक बार फिर उत्तर मध्य रेलवे ने इस पर सर्वे कराया है और उम्मीद जताई जा रही है कि जिले के लहार क्षेत्र से होते हुए यूपी के कई बड़े शहरों तक रेलवे की कनेक्टिविटी होगी।
यह रेल लाइन न केवल भिण्ड, लहार और कोंच जैसे क्षेत्रों को जोड़ेगी, बल्कि चंबल और बुंदेलखंड के बीच एक महत्त्वपूर्ण संपर्क स्थापित करेगी। इससे कृषि उत्पादों के परिवहन में सुगमता आएगी, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय पर्यटन को भी गति मिलेगी। छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए आवागमन आसान होगा, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी। यह परियोजना इस पिछड़े क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अपूर्व साबित होगी।