शहर के सुभाष तिराहे से इंदिरा गांधी चौराहे के बीच बायपास रोड का जायजा लिया, तो हालात और भी चौंकाने वाले मिले। हर चार में से एक डंपर ऐसा मिला, जिस पर या तो नंबर ही नहीं था या नंबर प्लेट इस तरह छिपाई गई थी कि उसे देख पाना लगभग असंभव था।
भिण्ड. जिले के हाईवे अब सिर्फ रास्ते नहीं, बल्कि मौत के खुले गलियारे बन चुके हैं। यहां बेलगाम दौड़ रहे डंपर कानून और इंसानी जिंदगी, दोनों को रौंदते नजर आते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि हादसे के बाद इन डंपरों की पहचान करना ही सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। वजह साफ है, या तो इन पर रजिस्ट्रेशन नंबर होते ही नहीं, या फिर नंबर प्लेट ऐसी जगह लगाई जाती है जहां से उसे पढ़ पाना नामुमकिन हो।
जो नंबर प्लेट नियमों के मुताबिक लगी भी होती है, उसे जानबूझकर धूल-मिट्टी और कीचड़ से इस कदर ढक दिया जाता है कि हादसे के बाद कोई सुराग ही नहीं बचता। नतीजा, डंपर चालक बेखौफ होकर भाग निकलता है और पुलिस सिर्फ सीसीटीवी खंगालने तक सीमित रह जाती है।
पत्रिका टीम ने जब शहर के सुभाष तिराहे से इंदिरा गांधी चौराहे के बीच बायपास रोड का जायजा लिया, तो हालात और भी चौंकाने वाले मिले। हर चार में से एक डंपर ऐसा मिला, जिस पर या तो नंबर ही नहीं था या नंबर प्लेट इस तरह छिपाई गई थी कि उसे देख पाना लगभग असंभव था। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि नियमों की खुली धज्जियां उड़ाने का मामला है और प्रशासन की नाकामी भी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस की कार्रवाई आखिर सिर्फ हादसों के बाद ही क्यों जागती है? दो-चार दिन की दिखावटी सख्ती के बाद फिर वही ढर्रा शुरू हो जाता है। नतीजा—हाईवे पर मौत का खेल जारी रहता है।
20 मई 2025 को गोहद चौराहा क्षेत्र में दो युवकों को डंपर चालक ने कुचल दिया। नंबर नहीं होने से चालक डंपर लेकर भाग गया। बाद में पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों व अन्य तरीके से डंपर को पकड़ा।
26 दिसंबर 2025 को गोहद में बंजारे का पुरा के पास तेज रफ्तार डंपर ने ट्रैक्टर ट्रॉली में टक्कर मार दी, जिसमें 15 लोग घायल हुए और एक मकिहला की मौके पर ही मौत हो गई। डंपर पर नंबर स्पष्ट नहीं था, जिससे वह मौके से भाग गया।
15 फरवरी को शहर में बाईपास रोड पर एक दूध टैंकर ने भी युवक को कुचल दिया था और मौके से फरार हो गया था। परिजनों ने जाम लगाया, पुलिस ने उसे बाद में पता करके नामजद किया था। हालांकि भागने की दिशा के आधार पर फूप पुलिस ने उसे जब्त किया।
फैक्ट फाइल 80 किलोमीटर का हाईवे भिण्ड-ग्वालियर के बीच। 500 से ज्यादा सडक़ हादसे होते हैं हाईवे पर हर साल। 1403 लोग जान गंवा चुके हैं सात साल में हाईवे पर। 5 हजार से ज्यादा लोग घायल होते हैं हर साल हाईवे पर। 4 चाल पहले से चौड़ीकरण की है घोषणा, अमल नहीं। 22 हजार से ज्यादा भारी वाहनों का लोड है हाईवे पर।
भिण्ड-ग्वालियर और भिण्ड-भांडेर मार्ग अब ‘मौत के हाईवे’ के नाम से कुख्यात होते जा रहे हैं। हर साल औसतन 200 लोगों की जान सडक़ हादसों में चली जाती है। ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की गवाही हैं।
औसतन 50 बड़े वाहनों पर बिना नंबर प्लेट या मानकों के अनुरूप नहीं होने पर चालानी कार्रवाई की जाती है। सभी थानों में की जाती है। फिर भी कुछ चालक बचने की मंशा से नंबर प्लेट गलत जगह लगाते हैं या उसे गंदा कर लेते हैं। फिर दिखवाएंगे।
राघवेंद्र भार्गव, यातायात प्रभारी, भिण्ड।