23 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

रिकॉर्ड उपज, लेकिन जेब खाली, आलू की फसल से किसानों को भारी नुकसान

जिले में आलू की पैदावार करने वाले किसानों ने प्रशासन और सरकार से गुहार लगाई है कि आलू की खरीद की गारंटी दी जाए या न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए। किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही हस्तक्षेप नहीं किया और सब्सिडी या बाजार सुविधाएं उपलब्ध नहीं करईं, तो क्षेत्र का अन्नदाता पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भिंड

•

image

Vikash Tripathi

•

Updated: 22 Mar 2026, 11:57 PM IST

bhind news

भिण्ड. सब्जी के राजा कहे जाने वाले आलू की फसल ने इस बार किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। बंपर पैदावार से फसल के दाम जमीन पर आ गए हैं। ऐसे में किसानों को लागत निकलना मुश्किल हो गया है। एक हेक्टेयर (पांच बीघा) आलू की फसल की लागत लागत एक लाख रुपए से अधिक है। वहीं फसल के दाम 70 हजार रुपए बैठ रहे हैं। प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपए के घाटे से किसानों का बड़ा झटका लगा है। आलू का कोल्ड स्टोर में भंडारण कर किसान उसकी कीमत बढऩे की आस लगाए बैठे हैं।

बता दें जिले में इस साल दस हजार हेक्टेयर में किसानों ने आलू की फसल लगाई है। घाटे का सौदा बन गई है। किसानों को लोकल और बाहर की मंडियों में बमुश्किल आलू का भाव चार से पांच रुपए प्रति किलो मिल रहा है। जबकि थोक कंपनियों ने मुंह फेर लिया है। यह स्थिति यूपी के एटा, कन्नोज, आगरा, फर्रूखाबाद, कन्नोज, हाथरस और फिरोजाबाद में हुई आलू की बंपर पैदावार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही उथल पुथल तथा अमेरिका से भारत की आलू और गेहूं को लेकर हुई संधि के चलते पैदा हुई है। जिसका खामियाजा जिले के हजारों किसानों को उठाना पड़ रहा है। किसानों की लागत नहीं निकलने से आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। किसानों के अनुसार इससे पहले अतिवर्षा से पहले फसलें चोपट हो गई थीं इस बार अच्छी पैदावार हुई तो भाव नहीं मिल रहे हैं।

किसानों ने की एमएसपी की मांग

जिले में आलू की पैदावार करने वाले किसानों ने प्रशासन और सरकार से गुहार लगाई है कि आलू की खरीद की गारंटी दी जाए या न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए। किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही हस्तक्षेप नहीं किया और सब्सिडी या बाजार सुविधाएं उपलब्ध नहीं करईं, तो क्षेत्र का अन्नदाता पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।

लागत से बेहद कम मिल रही कीमत

मानपुरा के किसान रामदास की मानें तो पांच बीघा आलू की फसल में डीएपी 7000, जुताई 3000, पट्ट्टा 40000, कीटनाशक 6000, ङ्क्षसचाई 3000, खुदाई 16000 व भराई 2500 और बीज 30,000 शामिल है। इस प्रकार कुल लागत एक लाख रुपए से अधिक है। प्रति बीघा करीब 40 पैकेट उत्पादन हो रहा है। इस प्रकार एक एकड़ में 200 पैकेट के आसपास उत्पादन है। वर्तमान में बाजार दर 350 रुपए प्रति पैकेट के हिसाब से कुल पैदावार की कीमत मात्र 70,000 रुपए बैठ रही है। ऐसे में किसान अपनी मूल पूंजी भी नहीं बचा पा रहा है।

अगर आलू कोल्ड स्टोरेज में रखें तो 160 रुपए प्रति पैकेट का अतिरिक्त बोझ पढ़ेगा। बड़े पैमाने पर खेती करने वालों को 5 से 7 लाख तक का घाटा हो रहा है।
रामकुमार कुशवाह, किसान, पुर
&बुबाई के समय बीज 20-25 रुपए किलो मिला था, आज बेचने चले ता 4-5 रुपए किलो का भाव मिल रहा है। मुझे अकेले इस फसल में 50,000 का घाटा दिख रहा है।
रामनरेश यादव, किसान, दीनपुरा

इस साल आलू का बंपर उत्पादन हुआ है, लेकिन भाव डाउन होने से किसानों की लागत नहीं निकल पा रही है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही उथल पुथल के चलते पैदा हुई है।
पंकज सविता, तकनीकी सहायक कृषि भिण्ड

फैक्ट फाइल

30 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर का घाटा।
50 प्रतिशत पिछले साल से घटा भाव।
40 पैकेट का प्रति बीघा में उत्पादन।
70 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर आई लागत।