राजस्थान में भिवाड़ी के खुशखेड़ा में अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 7 श्रमिकों की मौत के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डीएसटी भंग कर दी। आरोपी हेमंत शर्मा का भाई ही टीम इंचार्ज था। आईजी कार्यालय ने जांच शुरू की, जबकि कांग्रेस ने उच्च स्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
Bhiwadi Blast: खुशखेड़ा पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद पुलिस में भी बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। हादसे के तीसरे दिन भिवाड़ी डीएसटी को भंग कर दिया गया है। डीएसटी का प्रभार अभी हेड कांस्टेबल योगेश शर्मा के पास था। योगेश शर्मा खुशखेड़ा पटाखा हादसे में पकड़े गए हेमंत शर्मा का भाई है।
बता दें कि उक्त फैक्ट्री का किरायानामा हेमंत के नाम से था। पुलिस के ऊपर आरोप लगने की वजह से उच्चाधिकारियों ने यह फैसला लिया है। हेमंत शर्मा के साथ हेड कांस्टेबल योगेश की मिलीभगत, संरक्षण सहित अन्य पहलुओं को लेकर आईजी कार्यालय ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, यह भी सामने आया है कि फैक्ट्री का संचालन हेमंत सचदेवा करता था, उसकी पत्नी ज्योति के नाम से बीडीआई सोसाइटी में एक फ्लैट है, जिसमें योगेश और सीआई मुकेश कुमार ठहरते थे। पुलिस ने हेमंत के शाहजहांपुर स्थित आवास और ज्योति के बीडीआई स्थित आवास पर सर्च अभियान भी चलाया।
इस तरह पुलिसकर्मियों की पटाखा फैक्ट्री मालिक से जान पहचान और उसके फ्लैट पर ठहरने की बात सामने आने के बाद डीएसटी को भंग किया गया है। डीएसटी में अभी योगेश के साथ कांस्टेबल दिनेश कुमार, विजय कुमार, जसपाल मान सिंह को हटा दिया गया है। सभी को रिजर्व लाइन में लगाया गया है।
खुशखेड़ा पटाखा फैक्ट्री विस्फोट के बाद काम करते महिला और बाल श्रमिकों का वीडियो वायरल हो रहा है। भूखंड संख्या संख्या जी-1/682 में स्टील फैब्रिकेशन की आड़ में अवैध रूप से पॉपअप पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। अब इस फैक्टरी का वीडियो सामने आया है, जिसमें अंदर चल रही गतिविधियां स्पष्ट दिखाई दे रही हैं।
वीडियो में महिलाओं के साथ छोटे बच्चे भी पटाखों की पैकिंग और निर्माण कार्य में लगे हुए नजर आ रहे हैं, जिसमें श्रम कानूनों का उल्लंघन दिखाई देता है। औद्योगिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी उजागर होती है।
खुशखेड़ा इंडस्ट्रीज एरिया में अवैध रूप से संचालित पटाखा इकाई में हुए भीषण धमाके को लेकर बुधवार को कांग्रेस ने तीखा विरोध जताया। खैरथल-तिजारा कांग्रेस जिलाध्यक्ष बलराम यादव के नेतृत्व में जिलाध्यक्ष पवन खटाना, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष देवेंद्र, भिवाड़ी के पूर्व सरपंच दयाराम तंवर, फतेह मोहम्मद, खुर्शीद खान एडवोकेट, परवेज आलम, जमालुद्दीन, वीर सिंह रईसा, आसिफ खान टपूकड़ा, वीर सिंह, नवीन कुमार, जेडी खान सहित सैकड़ों कार्यकर्ता एकत्रित हुए। प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर, भिवाड़ी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि हाल में औद्योगिक क्षेत्र में संचालित एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में कई श्रमिकों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि अनेक गंभीर रूप से झुलस गए। कांग्रेस नेताओं ने इसे सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक ढिलाई का परिणाम बताया।
नेताओं का आरोप है कि संबंधित परिसर बिना वैध स्वीकृति, पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और नियमित निरीक्षण के संचालित हो रहा था। यदि समय रहते सख्ती बरती जाती तो इतना बड़ा हादसा रोका जा सकता था।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार से अवैध इकाई के मालिक, संचालक और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या सहित कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। पूरे मामले की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच कर लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही गई।
मृतकों के परिजनों को घोषित तीन लाख रुपए की सहायता राशि को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर सम्मानजनक मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी अथवा स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की गई। घायलों के समुचित, नि:शुल्क व गुणवत्तापूर्ण उपचार की व्यवस्था सरकारी खर्च पर सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित अवैध इकाइयों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर नियमित निरीक्षण प्रणाली लागू करने की आवश्यकता जताई गई, ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग दोहराई। जिलाध्यक्ष बलराम यादव ने चेतावनी दी कि ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पार्टी व्यापक आंदोलन करेगी।
खुशखेड़ा पटाखा फैक्ट्री हादसे में गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी हेमंत शर्मा और अभिनंदन तिवारी को बुधवार को तिजारा कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने बताया कि कोर्ट ने चार दिन की पुलिस अभिरक्षा दी है। हेमंत शर्मा के नाम से किरायानामा है और अभिनंदन तिवारी सुपरवाइजर था।
भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित अवैध पटाखा गोदामों और निर्माण इकाइयों को लेकर प्रशासन ने फिर से सख्ती शुरू कर दी है। खुशखेड़ा में सात श्रमिकों की मौत के बाद 21 अक्टूबर 2024 को पथरेड़ी स्थित फैक्ट्री में लगी आग तथा 23 अप्रैल 2024 को बंदापुर औद्योगिक क्षेत्र में हुए विस्फोट की पड़ताल दोबारा आरंभ की गई है। दोनों प्रकरणों की फाइलें तलब कर ली गई हैं।
बुधवार को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने रीको पदाधिकारियों के साथ बैठक कर औद्योगिक इकाइयों का रिकॉर्ड खंगाला। पूर्व में की गई कार्रवाई, नोटिस प्रक्रिया और अनुमति संबंधी दस्तावेजों की समीक्षा की गई। खुशखेड़ा प्रकरण से जुड़े तार पुराने मामलों से जोड़े जा रहे हैं, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने की संभावना है।
पथरेड़ी स्थित इकाई में धमाके के बाद रीको ने भूखंड को तीन माह की नोटिस प्रक्रिया के तहत निरस्त किया, लेकिन मात्र एक माह में पुन: बहाल कर दिया। उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र गार्मेंट जोन घोषित है, जहां केवल वस्त्र उत्पाद निर्माण की अनुमति है। इसके बावजूद वहां कथित रूप से अवैध पटाखा निर्माण जारी रहा। इससे विभागीय सतर्कता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
बंदापुर औद्योगिक क्षेत्र में हुए विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री का टीनशेड करीब आधा किलोमीटर दूर जा गिरा। बारूद के गोले आसपास गिरे, जिससे एक गत्ता इकाई और एक एल्युमिनियम फैक्टरी प्रभावित हुई। घटना के समय परिसर में लगभग तीन दर्जन श्रमिक मौजूद थे। आग भड़कने के बाद सभी बाहर निकल आए, जिससे बड़ा जनहानि टल गई। बावजूद इसके, उस समय कोई कठोर प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया।
पूर्व की घटनाओं के बाद प्रभावी कार्रवाई न होने का परिणाम खुशखेड़ा में सामने आया, जहां सात श्रमिकों की जान चली गई और चार घायल हुए। अब जांच एजेंसियां यह पड़ताल कर रही हैं कि चूक कहां हुई और किन स्तरों पर लापरवाही बरती गई।