ऐसा पहली बार हुआ है कि, मात्र एक दिन में की गई 46 हजार 526 जांचों में से 8 हजार 998 संक्रमितों की पुष्टि हुई है।
भोपाल/ मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण को लेकर हालात लगातार बेकाबू हो रहे हैं। आलम ये है कि, ऐसा पहली बार हुआ है कि, मात्र एक दिन में की गई 46 हजार 526 जांचों में से 8 हजार 998 संक्रमितों की पुष्टि हुई है। आपको याद हो कि, कोरोना की पहली लहर में इतने केस सामने आने में 3 माह का अंतराल लगा था। बता दें कि, मध्य प्रदेश में सबसे पहले कोरोना केस की पुष्टि 18 मार्च 2020 को जबलपुर में हुई थी। इसके बाद 4 जुलाई 2020 तक प्रदेश में कोरोना संक्रमितो की कुल संख्या 8,996 हुई थी। सिर्फ यहीं आंकड़े कोरोना की दूसरी लहर की तीव्रता और इससे होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाने के लिये पर्याप्त है।
डरा रहे हैं आंकड़े
मंगलवार देश शाम सामने आए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किये गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 40 मौतें दर्ज की गईं। इसमें सबसे अधिक इंदौर और ग्वालियर में 6-6 और भोपाल में 5 मौतें हुईं। इसके अलावा, जबलपुर में 4। साथ ही, प्रदेश के छोटे शहरों में भी अब संक्रमण से मौतों का आंकड़ा बढञने लगा है। रतलाम में 3 और देवास व आगर मालवा में 2-2 लोगों की मौत हुई है। बता दें कि, प्रदेश में कोरोना से कुल 4,261 लोग जान गवा चुके हैं।
रोजाना टूट रहा पिछला रिकॉर्ड
वहीं, बात की जाए, पिछले 24 घंटों की तो प्रदेश में अब तक सामने आए सभी केसों में सबसे अधिक यानी 8 हजार 998 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। भोपाल में ही रिकाॅर्ड 1456 नए केस सामने आए हैं, ग्वालियर में 576 और जबलपुर में 552 पॉजिटिव केस मिले हैं। उज्जैन में 317 और बड़वानी में 237 संक्रमित मिले हैं। इसके अलावा 19 शहर ऐसे हैं, जहां 100 से 200 केस आए।
पॉजिटिवटी रेट 19% पर
गहराते कोरोना संकट के चलते अस्पतालों में इंतजाम कम पड़ने लगे हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि, प्रदेश में 1 लाख बेड की व्यवस्था की जा रही है। ऑक्सीजन और दवा की भी कमी नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे विपरीत नजर आ रही है। फिलहाल, अब सरकार का फोकस संक्रमितों को हाेम आइसोलेट करके इलाज देने पर फोकस्ड है। प्रदेश में कोरोना का प्रदेश में एक्टिव केस 43,000 के पार है। 12 अप्रैल को प्रदेश का औसत पॉजिटिवटी रेट 19 फीसदी पर आ पहुचा है, जबकि, मात्र 6 दिन हले ही यानी 6 अप्रैल को ये 12 फीसदी पर था। वहीं, अगर WHO की मानें तो पॉजिटिविटी रेट 3 फीसदी से ऊपर जाना खतरे की निशानी है, जबकि मौजूदा पॉजिटिविटी रेट उससे 6 गुना अधिक है।
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