भोपाल

कार्डयिक अरेस्ट आने पर ‘5 मिनट’ के अंदर दें CPR, तभी बचेगी जान, भोपाल एम्स दे रहा ट्रेनिंग

CPR Training: एक्सपर्ट का कहना है कि 70 से 72 प्रतिशत कार्डियक अरेस्ट अस्पताल के बाहर होते हैं, इसलिए आम नागरिकों को सीपीआर का प्रशिक्षण देना बहुत जरूरी है।

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Jun 10, 2026
AIIMS Bhopal is providing CPR training ((Photo Source- freepik)
AIIMS Bhopal: भोपाल एम्स लगातार दे रहा आम नागरिकों को सीपीआर का प्रशिक्षण (Photo Source: freepik)

Cardiac arrest:एमपी के भोपाल शहर में बीते दिन पुलिस आयुक्त कार्यालय मेंएक युवक के कार्डियक अरेस्ट होने पर पुलिस कर्मियों ने समय पर सीपीआर देकर उसकी जान बचाई। लेकिन भोपाल सहित मध्यप्रदेश में बहुत ही कम ऐसे भाग्यशाली है, जिन्हें कार्डियक अरेस्ट होने के तीन से पांच मिनट के भीतर सीपीआर देने वाले मिल जाएं और उसकी जान बचा लें। वजह सीपीआर जानने वाले बहुत ही कम लोग है।

इसके उलट कार्डियक अरेस्ट का खतरा दिन पर दिन बढ़ रहा है। एम्स भोपाल और पुलिस विभाग द्वारा चलाए गए सीपीआर प्रशिक्षण अभियान के अनुसार, भोपाल में सीपीआर का प्रशिक्षण लेने वालों की संख्या 1.3 से दो प्रतिशत है और पूरे प्रदेश में यह संख्या कुछ ही अधिक है। आम लोगों द्वारा दी जाने वाली सीपीआर की दर केवल 1.3 से 9.8 प्रतिशत के बीच है। यानी कार्डियक अरेस्ट के 100 मरीजों में से 90 को समय पर सीपीआर नहीं मिल पाती है।

जीवित बचने की दर पांच प्रतिशत से भी कम

विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक होने वाले 70 से 72 प्रतिशत अधिक कार्डियक अरेस्ट के मामले अस्पताल के बाहर होते हैं, जहां सीपीआर देने वाला प्रशिक्षित व्यक्ति निर्णायक भूमिका निभा सकता है। एम्स के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट के बाद जीवित बचने की दर 5 प्रतिशत से भी कम होती है, जबकि पहले तीन मिनट में सीपीआर मिलने पर जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ सकती है। अध्ययन के अनुसार, सीपीआर के बाद 32.5 प्रतिशत लोग जीवित अस्पताल पहुंचते हैं। अस्पताल से डिस्चार्ज होकर जीवित घर जाने की दर केवल 8.8 प्रतिशत पाई गई है।

70 से 72 प्रतिशत कार्डियक अरेस्ट अस्पताल के बाहर होते हैं, इसलिए आम नागरिकों को सीपीआर का प्रशिक्षण देना बहुत जरूरी है। जितना अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उतनी ही कार्डियक अरेस्ट के मरीजों को समय पर सीपीआर मिलने और जान बचने की संभावनाएं बढ़ेगी।- डॉ. भुषण शाह, कार्डियोलॉजिस्ट, एम्स भोपाल

एम्स लगातार दे रहा प्रशिक्षण

एम्स स्कूलों, मीडियाकर्मियों और आम नागरिकों को सीपीआर का प्रशिक्षण दे रहा है। संस्थान ने आम लोगों को सीपीआर सिखाने के लिए कोड इमर्जेंसी मोबाइल ऐप भी शुरू किया है। दो साल पहले प्रदेश की पुलिस ने राज्यव्यापी अभियान चलाकर 22 हजार पुलिसकर्मियों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया था।

ये है सीपीआर देने का तरीका

  • सबसे पहले व्यक्ति को सपाट और कठोर सतह पर सीधा लिटा दें।
  • तुरंत किसी एंबुलेंस को कॉल करें।
  • व्यक्ति की छाती के ठीक बीचों-बीच अपने दोनों हाथों की हथेलियों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर लॉक करें।
  • छाती को लगभग 5 से 6 सेमी (2 इंच) तक तेजी से नीचे दबाएं।
  • एक मिनट में 100 से 120 बार (यानी लगभग प्रति सेकंड दो बार) दबाएं।
  • यदि आप प्रशिक्षित हैं, तो 30 बार छाती दबाने के बाद व्यक्ति के सिर को थोड़ा पीछे करें और ठुड्डी को ऊपर उठाएं।
  • उसकी नाक को बंद करें, अपना मुंह उनके मुंह पर पूरी तरह सटाएं और 1 सेकंड के लिए सांस फूकें।
  • ऐसा दो बार करें। यदि आप मुंह से सांस देने में असहज हैं, तो केवल छाती दबाने की प्रक्रिया जारी रखें।
Updated on:
10 Jun 2026 12:46 pm
Published on:
10 Jun 2026 12:29 pm