AIIMS Bhopal : भोपाल एम्स में मरीजों को आसान भाषा में कैंसर के इलाज का तरीका समझाया जाएगा। इसके लिए संस्थान में कैंसर अवेयरनेस एंड पेशेंट एम्पावरमेंट (केप) सुविधा केंद्र की शुरुआत की गई है।
AIIMS Bhopal : कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर मरीजों और उनके स्वजन का मानसिक तनाव और डर बढ़ जाता है। ये भी देखा जाता है कि, इलाज से ज्यादा बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियां मरीजों को तोड़ देती हैं। इस डर को खत्म करने और मरीजों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए मध्य प्रदेश की राजधानी में स्थित एम्स भोपाल ने ऐतिहासिक शुरुआत की है। संस्थान में कैंसर अवेयरनेस एंड पेशेंट एम्पावरमेंट (केप) सुविधा केंद्र की शुरुआत की है। ये केंद्र अस्पताल के तकनीकी इलाज और मरीज की सामान्य समझ के बीच एक मजबूत सेतु का किरदार निभाएगा।
अक्सर देखा जाता है कि, जानकारी के अभाव में मरीज समय रहते जांच नहीं कराते या इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं। ''केप'' केंद्र का मुख्य उद्देश्य कैंसर से जुड़ी गलतफहमियों को दूर कर उन्हें डरने के बजाय बीमारी के स्वरूप, उपचार के विकल्पों और दवाइयों के दुष्प्रभावों के बारे में सरल और आम बोलचाल की भाषा में समझाने का काम करेगा। यह केंद्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के उस संकल्प को पूरा करता है, जिसमें मरीज की जरूरतों को सर्वोपरि रखा गया है।
इस केंद्र को सिमुलेशन, ई-लर्निंग और टेलीमेडिसिन समिति के मार्गदर्शन में विकसित किया गया है। इसमें वरिष्ठ संचार विशेषज्ञ बीरेंद्र दास के परामर्श के साथ डीन प्रो. रजनीश जोशी, संजीव कुमार, सैकत दास और गुंजन चौकसे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्र में सिर्फ सूचनाएं नहीं दी जाएंगी, बल्कि वीडियो प्रिजेंटेशन के जरिएदो-तरफा बातचीत भी की जाएगी, ताकि परिजन के मन में उठने वाले हर सवाल का जवाब देकर उसे पूरी तरह संतुष्ट किया जा सके।
भारत में कैंसर के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए समय पर पहचान सबसे जरूरी है। ''केप'' सुविधा केंद्र लोगों को जागरूक करेगा कि वे बिना डरे समय पर जांच करवाएं। जानकारी के अभाव में होने वाली देरी को कम करके यह केंद्र न केवल मरीजों की जान बचाएगा, बल्कि इलाज के बाद भी उनकी जीवनशैली को बेहतर बनाने में मार्गदर्शन देगा। यह पहल कैंसर के उपचार को केवल एक डॉक्टरी प्रक्रिया से ऊपर उठाकर भरोसे और संवाद की दिशा में एक बड़ा कदम है।
-सरल भाषा: डाक्टरों की कठिन शब्दावली के बजाय स्थानीय भाषा में संवाद।
-दृश्य-श्रव्य माध्यम: वीडियो के जरिए इलाज की प्रक्रिया और जीवनशैली में बदलाव की समझ।
-मानसिक संबल: बीमारी के नाम से होने वाले तनाव और सामाजिक डर को कम करना।
-भरोसे का रिश्ता: मरीज और डाक्टर के बीच बेहतर तालमेल और उपचार के सटीक निर्णय।
-तंबाकू और शराब से दूरी: कैंसर के 40 प्रतिशत मामलों की मुख्य वजह यही है।
-हेल्दी डाइट: ताजे फल और हरी सब्जियों का अधिक सेवन करें।
-नियमित व्यायाम: दिन में कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या योग करें।
-नियमित जांच: 40 वर्ष की आयु के बाद साल में एक बार फुल बाडी चेकअप जरूर कराएं।
इस संबंध में भोपाल एम्स के कार्यपालक निदेशक प्रो. माधवानंद कर का कहना है कि, कैंसर के खिलाफ लड़ाई सिर्फ दवाओं से नहीं, बल्कि सही जानकारी और इच्छा शक्ति से भी जीती जाती है। ये केंद्र मरीजों को सशक्त बनाएगा, ताकि वे अपनी बीमारी को समझ सकें और बिना किसी डर के इलाज करा सकें।