MP News: मरीजों को लंबी कतारों में खड़े होने से मुक्ति मिलेगी और समय की भी बचत होगी।
MP News: एम्स में मरीजों के लिए अब तक पर्ची बनवानी सबसे बड़ी परेशानी थी। ओपीडी की भूलभुलैया, लंबी कतार और घंटों इंतजार के कारण कई मरीज इलाज से भी कतराने लगे थे। अब इस समस्या से राहत दिलाने के लिए एम्स भोपाल ने डिजिटल पहल की है। डीआरआइएफकेस एप्लिकेशन के माध्यम से मरीज महज एक मिनट में टोकन संख्या प्राप्त कर बिना लाइन में खड़े हुए पर्ची बनवा सकेंगे।
मोबाइल में डीआरआइएफकेस एप्लिकेशन डाउनलोड कर पंजीकरण करने के बाद इसमें कई विकल्प दिखाई देते हैं। इनमें पर्ची के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने की सुविधा भी शामिल है। एम्स भोपाल के ओपीडी विभाग की दीवारों पर लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन करते ही मरीज के मोबाइल पर टोकन संख्या प्राप्त हो जाती है। इस टोकन को पंजीकरण खिड़की पर दिखाते ही तुरंत पर्ची जारी कर दी जाती है। इससे मरीजों को लंबी कतारों में खड़े होने से मुक्ति मिलेगी और समय की भी बचत होगी।
चरण 1: क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए डीआरआइएफकेस एप्लिकेशन, मोबाइल कैमरा, किसी भी क्यूआर स्कैनर या एबीडीएम सक्षम एप्लिकेशन का उपयोग करें।
चरण 2: यदि एबीडीएम सक्षम एप्लिकेशन पहले से मोबाइल में उपलब्ध नहीं है तो उसे डाउनलोड कर पंजीकरण और लॉग-इन करें।
चरण 3: अस्पताल के साथ अपनी प्रोफाइल साझा कर पंजीकरण टोकन प्राप्त करें।
चरण 4: मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई दे रहे टोकन नंबर को दिखाकर पंजीकरण खिड़की से पर्ची लें और डॉक्टर से मिलें।
यह एप्लिकेशन केवल पर्ची बनवाने तक सीमित नहीं है। इसमें उपचार या ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक से फोन पर संपर्क करने की सुविधा दी गई है। मरीज अपनी आभा पहचान प्रोफाइल, जांच रिपोर्ट और अन्य स्वास्थ्य दस्तावेजों को स्वास्थ्य अभिलेख लॉकर में सुरक्षित रख सकते हैं।
एम्स भोपाल में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के मरीजों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। ओपीडी विभाग में संचालित वरिष्ठ नागरिक सहायता केंद्र में बुजुर्गों की पर्ची बनवाने से लेकर उन्हें व्हीलचेयर पर बैठाकर डॉक्टर तक पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध है।