
BSNL : भारत सरकार द्वारा BSNL को हर संभव समर्थन और सहायता के बाद भी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारियों के साथ गलत कर रहे हैं। नुकसान का हवाला देते हुए वेतन संशोधन नहीं दिया जा रहा। ऑल यूनियंस एंड एसोसिएशंस आफ बीएसएनएल (एयूएबी) ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि नुकसान की वजह सिर्फ कर्मचारियों को बताया जा रहा है लेकिन हकीकत तो यह है कि अधिकारी ही BSNL को चूना लगा रहे हैं। हाल ये है कि उच्च पेंशन अंशदान, अवकाश नकदीकरण आदि में 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। एयूएबी नेताओं ने कर्मचारियों के हित में हर कदम उठाने की बात कही है।
एयूएबी ने कर्मचारियों के हित के लिए उठाई आवाज
बीएसएनएल कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित तीसरे वेतन संशोधन को लागू करने की मांग को लेकर ऑल यूनियंस एंड एसोसिएशंस आफ बीएसएनएल (एयूएबी) ने आंदोलन तेज कर दिया है। भोपाल में एयूएबी ने चेतावनी दी है कि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं होने पर 20 नवंबर 2026 को देशव्यापी हड़ताल की जाएगी।
आंदोलन के तहत मध्यप्रदेश परिमंडल के लगभग एक हजार कर्मचारी आधिकारिक वाट्सएप समूहों से बाहर निकल गए। संयुक्त मंच ने देशभर के सांसदों को ज्ञापन सौंपकर सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग भी की है। इससे पहले एक अक्टूबर को बीएसएनएल के स्थापना दिवस पर भोपाल स्थित मध्य प्रदेश परिमंडल कार्यालय में लगभग तीन सौ कर्मचारियों ने भोजनावकाश के दौरान प्रदर्शन किया था।
एयूएबी के अनुसार, कर्मचारियों का तीसरा वेतन संशोधन एक जनवरी 2017 से लंबित है। वहनीयता संबंधी शर्त के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। संगठन नेताओं का कहना है कि बीएसएनएल सार्वजनिक सेवा संबंधी जिम्मेदारियां निभाने की अपेक्षा की जाती है, इसलिए कर्मचारियों को वेतन संशोधन का लाभ देने के लिए इस शर्त में छूट दी जानी चाहिए। बीएसएनएल (BSNL) कर्मचारियों की यूनियन का कहना है कि अधिकारियों के गलत और विसंगतिपूर्ण फैसलों के कारण दूरसंचार विभाग को 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा है। कर्मचारियों का पेंशन अंशदान वास्तविक वेतन के बजाय वेतनमान के अधिकतम स्तर पर काटा जा रहा था। लंबे संघर्ष के बाद पिछले साल ही इसे बदला गया। इसी तरह दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों को बीएसएनएल (BSNL) में समाहित करते समय उनकी अर्जित छुट्टियां भी बीएसएनएल में ट्रांसफर कर दी गईं जिसका भुगतान विभाग को ही करना पड़ा।