Bhopal Bada Talab Shrinks: भोपाल के बड़ा तालाब संरक्षण को लेकर हुई हाई-लेवल बैठक में सांसद आलोक शर्मा ने प्रशासन से तीखे सवाल दागे। 751 करोड़ खर्च होने के बावजूद तालाब सिमटकर 8-9 किमी रह गया।
MP News: भोपाल के बड़ा तालाब संरक्षण की दिशा में सोमवार को सांसद समेत प्रशासन के उच्चाधिकारी एकजुट हो गए। तालाब संरक्षण को लेकर पत्रिका की लगातार मुहिम का असर ये हुआ कि सांसद आलोक शर्मा ने सोमवार को कलेक्टर, निगम अधिकारियों सहित सभी प्रशासनिक अफसरों के साथ बैठक की। तालाब को लेकर सवाल जवाब हुए तो अफसर बगले झांकने लगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सभी एसडीएम को एक सप्ताह में तालाब किनारे के अतिक्रमण हटाकर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। अब हर सप्ताह कार्रवाई की प्रगति समीक्षा बैठक होगी।काम में बेपरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में बताया गया, तालाब अब 31 किमी का नहीं रहा। ये महज आठ से नौ किमी ही बचा है। इसके किनारे फार्म हाउस ने दबा लिए। पक्के मकान बनना तालाब की सीमा को खत्म करना है। सांसद आलोक शर्मा ने बैठक में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रमसिंह से पूछा कि अतिक्रमण हटाने के लिए एनजीटी ने अब तक कितने आदेश जारी किए है? कितने आदेशों का पालन किया गया है? भविष्य में कोई अतिक्रमण न हो और एनजीटी के आदेश पर अमल करने के लिए कोई टीम गठित की है क्या? इस टीम ने क्या-क्या कार्रवाई की है? बैठक में एडीएम अंकुर मेश्राम, नगर निगम अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ शर्मा, सभी एसडीएम, भोपाल चेंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल, क्रेडाई के अध्यक्ष मनोज मीक और भोपाल नर्सिंग एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. अनूप हजेला आदि शामिल हुए।
वक्फ की संपत्ति को लेकर उठने वाले विवाद पर आड़े हाथ लेते हुए सांसद शर्मा ने कहा कि भोपाल वक्फ की जागीर नहीं है। हर जगह रोड़ा अटकाना, लैंड जिहाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब वे मेयर थे तो ऐसे ही विवाद आते थे। उधर, कलेक्टर ने सभी एसडीएम से अलग-अलग चर्चा कर पूछा, अतिक्रमण हटाने के लिए क्या कार्रवाई की, जवाब कोई नहीं दे पाया। शर्मा ने कहा- तालाब का नए सिरे से मास्टर प्लान बनाने की जरूरत है। सेप्ट, केपीएमजी व कुमार एसोसिएट्स के सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए।
क्रेडाई अध्यक्ष मनोज मीक ने कमाल का भोपाल' अभियान के तालाब व नदी संरक्षण के चार प्रस्ताव ग्रीनबेल्ट सौंदर्गीकरण, ऑल वेदर रोड, जलस्तर, हेरिटेज टूरिज्म को रखा। बताया भोजताल पर पीएचडी शोध-रिपोर्ट, ओएम वैली, बेतवा बेसिन अभियान के पास उपलब्ध है। जिसे प्रशासनिक अध्ययन में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि कलियासोत नदी किनारे 33 मीटर ग्रीनबेल्ट का चिह्नांकन पहले ही हो चुका है। अतिक्रमण हटाकर किनारे विकसित करने की जरूरत है।
नोट- 751 करोड़ रुपए कुल खर्च हुए तालाब पर।