
Bhopal family 5 deaths: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के छोला थाना क्षेत्र के मालीखेड़ी में एक परिवार के पांच सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया। जिस घर में मां की ममता, पत्नी का साथ और बच्चों का प्यार दिखता था वहां सोमवार को चार संदिग्ध अवस्था में मिले। वहीं, घर के मुखिया नरेंद्र साहू का शव रेलवे ट्रैक के पास मिला। प्रथमदृष्टया में इसके पीछे आर्थिक तंगी और कर्ज को वजह माना जा रहा है और संदेह में मृतक नरेंद्र साहू है। पुलिस की प्राथमिक जांच के अनुसार परिवार के बाकी चार सदस्यों की मौत शनिवार की रात या रविवार के तड़के होने की आशंका जताई जा रही है। चारों सदस्यों के गले पर गंभीर चोट के निशान होने से सभी की हत्या किए जाने का संदेह है।
पुलिस जांच में सामने आया कि नरेंद्र की मां-पत्नी और बच्चे रविवार को दिन में नजर नहीं आए थे। बच्चे सुबह ही साइकिल लेकर कॉलोनी में घूमने लगते थे, लेकिन रविवार को वे घर से बाहर नहीं निकले। पड़ोसी ने यह बताया कि नरेंद्र की पत्नी सोमलता साहू उसके साथ मंदिर दर्शन करने जाती थीं, लेकिन रविवार को वे बाहर नहीं निकलीं और मंदिर नहीं गई।
शशांक जैन ने बताया कि भाई महेंद्र, बहन मधु और जीजा दीपक से पूछताछ में नरेंद्र की आर्थिक परेशानियों की जानकारी मिली है। उस पर 40 लाख रुपए का कर्ज होने की बात सामने आई है।
नरेंद्र के जीजा दीपक जो मालीखेड़ी में ही इस कॉलोनी से 500 मीटर दूर रहते हैं, बताया कि सोमवार सुबह साले नरेंद्र का फोन आया। उसने कहा था कि 'घर चले जाओ जरूरी है…।' उसे कुछ अस्वाभाविक नहीं लगा इसलिए वह आराम से वहां आया लेकिन घर बंद था। पड़ोसियों के मुताबिक, दीपक को नरेंद्र की मौत की खबर मिली तो उसने घर में प्रवेश किया। घर में घुसते ही उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। दीपक ने जोर-जोर से कहने लगा कि 'सब खत्म हो गए, सब खत्म हो गए।'
नरेंद्र की बहन मधु और जीजा दीपक से शुरुआती पूछताछ में पता चला कि नरेंद्र ने पहले खेजड़ा में कमाई करके मकान बनाया था। उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी थी। बाद में उसने होटल और कैटरिंग के कारोबार में साझेदारी की, लेकिन पिछले एक साल में कारोबार में लगातार नुकसान होने से वह कर्ज में डूबता चला गया। कर्ज चुकाने के लिए उसे अपना मकान और कार तक बेचनी पड़ी। इसके बाद परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनी मालीखेड़ी की एलआईजी कॉलोनी में किराए के मकान में रहने लगा। कर्ज हो गया था तो उसे चुकाने के लिए नरेंद्र ने आष्टा के एक रिसॉर्ट में कुक की नौकरी कर ली थी। हालांकि, 15 से 20 दिन पहले वह नौकरी छोडकर भोपाल लौट आया था और फिलहाल बेरोजगार था।