Drinking Water Crisis: पेयजल संकट गहराने पर आम जनता की राय- अनियमित सप्लाई से बढ़ी परेशानी, लो प्रेशर भी बड़ा कारण।
Drinking Water Crisis: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कोलार इलाके में गर्मी शुरु होते ही पेयजल संकट गहराने लगा है। पेयजल संकट के कारण अब लोगों की परेशानियां भी खुलकर सामने आने लगी हैं। रहवासियों का कहना है कि विकास और नई कॉलोनियों के विस्तार के बावजूद बुनियादी सुविधा पानी आज भी पर्याप्त और नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रहा। क्षेत्र के कई इलाकों में पानी की सप्लाई तय समय पर नहीं हो रही। कहीं एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का ये भी कहना है कि सरकारी सप्लाई की कमी का फायदा निजी टैंकर संचालक उठा रहे हैं।
पेयजल संकट गहराने पर लोगों का कहना है कि उन्हें अपनी दिनचर्या पानी के हिसाब से तय करनी पड़ती है। सुबह-सुबह पानी आने की उम्मीद में लोगों को जागना पड़ता है, लेकिन कई बार निराशा ही हाथ लगती है। वहीं,कोलार के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर है। यहां पाइपलाइन से पानी का प्रेशर इतना कम होता है कि कई घरों तक पानी पहुंच ही नहीं पाता। नतीजतन, लोग मोटर पंप या निजी टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं। इससे बिजली की खपत भी बढ़ रही है और जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि जब तक जल प्रबंधन को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी और मांग के अनुसार सप्लाई नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक कोलार जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में जलसंकट बना रहेगा। फिलहाल, क्षेत्र के लोग बेहतर और नियमित पेयजल व्यवस्था की आस में प्रशासन की ओर देख रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी सप्लाई की कमी का फायदा निजी टैंकर संचालक उठा रहे हैं। गर्मियों में टैंकरों के दाम बढ़ जाते हैं, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है। कई परिवारों को हर महीने हजारों रुपये केवल पानी पर खर्च करने पड़ रहे हैं।
लोगों ने यह भी बताया कि कई जगह पाइपलाइन लीकेज की समस्या आए दिन बनी रहती है। सड़कों पर बहता पानी एक ओर संसाधनों की बर्बादी है, वहीं दूसरी ओर सप्लाई प्रभावित होने का कारण भी बनता है, समय पर मरम्मत नहीं होने से समस्या और बढ़ जाती है।
रहवासियों का कहना है कि हर साल गर्मी आते ही यही हालात बन जाते हैं। योजनाओं की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। नई कॉलोनियों को अनुमति देने से पहले जलापूर्ति की ठोस व्यवस्था नहीं की जाती, जिससे दबाव और बढ़ता है।