bhopal news: मुनि साध्य सागर एवं मुनि विश्व सूर्य सागर के सानिध्य में सजे भक्ति के रंग; 10 अप्रैल को विश्व शांति महायज्ञ के साथ होगा समापन।
bhopal news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के झिरनो स्थित नेमिनाथ दिगंबर जैन जिनालय में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अनूठा प्रवाह देखने को मिल रहा है। राष्ट्रसंत आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि साध्य सागर एवं मुनि विश्व सूर्य सागर के सानिध्य में सिद्धचक्र महामण्डल विधान का शुभारंभ हुआ। नेमिनाथ भक्त मंडल के तत्वाधान में आयोजित इस आठ दिवसीय अनुष्ठान के प्रथम दिन समूचा जिनालय परिसर जयकारों से गुंजायमान रहा।
कार्यक्रम का मंगल प्रारंभ मूलनायक भगवान नेमिनाथ के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। प्रवक्ता अंशुल जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि विधान के प्रथम दिन मंडप प्रतिष्ठा, इंद्र प्रतिष्ठा एवं घट यात्रा जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक क्रियाएं शुद्ध मंत्रोच्चार के साथ संपन्न की गईं। इस अवसर पर आचार्य विद्या सागर, आचार्य समय सागर और आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन कर मुनि संघ को शास्त्र भेंट किए गए। मंदिर परिसर में निर्मित अत्यंत आकर्षक और भव्य मंडल श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
विधान के दौरान सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य मनोज जैन (एडवोकेट), बबीता जैन एवं उनके परिवार को प्राप्त हुआ, जिन्होंने भक्तिभाव से भगवान की आराधना की। इसके साथ ही हितेंद्र-अंजू, प्रांजल, आराध्य, आयुषी और प्रियांशी जैन ने मुनि संघ के पाद प्रक्षालन की क्रियाएं संपन्न कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अनुष्ठान के प्रमुख पात्रों में संजय-मनीषा, दिव्य-सौम्या, पंकज-समता, अनुभव-प्रगति, संजय-समता (महावीर), विपिन-मनीषा (एमपीटी) और पीयूष-अलका जैन आदि ने भक्तिपूर्ण हृदय से मंडल पर अर्घ्य समर्पित किए।
सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री साध्य सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन की जीवटता का उपयोग अध्यात्म मार्ग में करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिद्धचक्र विधान केवल एक बाह्य क्रिया नहीं, बल्कि अपनी आत्मा को परमात्मा बनाने की साधना है। वहीं, मुनि विश्व सूर्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि पुण्य की बेला और ऐसे महान अनुष्ठान में शामिल होने का सौभाग्य अत्यंत दुर्लभ पलों में मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि इस अनुष्ठान के माध्यम से अपनी आत्मा पर जमी कर्मों की कालिमा को स्वच्छ और निर्मल बनाकर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हों।
प्रवक्ता अंशुल जैन के अनुसार, जिनालय में प्रतिदिन श्रीजी का सामूहिक पूजन, विधान अर्घ्य अर्पण और संध्या कालीन महाआरती के साथ मुनि के प्रवचन होंगे। इस आठ दिवसीय आध्यात्मिक महाकुंभ का समापन 10 अप्रैल को विश्व शांति महायज्ञ और पूर्णाहूति के साथ होगा। मंदिर समिति एवं भक्त मंडल ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से इस धर्म गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।