
Bhopal News : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के वासियों के लिए लाइफलाइन कहा जाने वाला बड़ा तालाब अपने फुल टैंक लेवल 1666.80 फीट से महज एक फीट दूर है और हर बार की तरह इस बार भी भदभदा डैम के गेट वक्त से पहले खोलने की तैयारी की जा रही है। कहने को तो इसे कैचमेंट कंट्रोल और बाढ़ नियंत्रण की कवायद बताया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
बड़ा तालाब के डूब क्षेत्र में फैले नौकरशाहों, नेताओं और रसूखदारों के अवैध निर्माण को पानी में डूबने से बचाने के लिए प्रशासन हर साल एफटीएल यानी फुल टैंक लेवल से पहले ही भदभदा के गेट खोलकर पानी बहा देता है।
आरटीआई एक्टिविस्ट नितिन सक्सेना और स्थानीय विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में मंत्रियों, विधायकों, पूर्व मुख्य सचिवों, आइएएस - आइपीएस अफसरों और डॉक्टरों के लग्जरी फार्म हाउस, होटल, अस्पताल और रिसॉर्ट बने हुए हैं। उन्हें बचाने का खेल सालों से अफसरशाही करती आ रही है। इस बार भी ऐसा ही करने की तैयारी है।
राशिद नूर ने कहा कि, ग्राउंड रियल्टी के अनुसार अगर तालाब का जलस्तर 1666.80 फीट तक पूरा भरता है तो डूब क्षेत्र में स्थित 25 अवैध कॉलोनियां, 270 अवैध भवन और 150 व्यावसायिक परिसर जलमग्न हो जाएंगे। कोरोना काल के दौरान जब जलस्तर 1,666.80 फीट तक पहुंचा था, तब एफटीएल क्षेत्र में बने अस्पतालों, होटलों और 200 से अधिक मकानों में घुटनों तक पानी भर गया था।
वहीं, दूसरी तरफ मामले को लेकर निगम आयुक्त संस्कृति जैन का कहना है कि, भदभदा डैम के गेट हमेशा एफटीएल की तय सीमा (1,666.80 फीट) तक पानी पहुंचने पर ही खोले जाते हैं। इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है।