भोपाल

Bhopal Sealing Drive: लो-लाइन एरिया में अफसरों के बंगले बन रहे बाधा, मास्टर प्लान अटकने की ये हैं 5 वजह

Bhopal Sealing Drive: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद भोपाल मास्टर प्लान लागू नहीं हो पा रहा है, पिछले 2021 और 2031 के ड्राफ्ट विभिन्न गड़बड़ियों के कारण रुक गए।
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Sep 25, 2026
अफसरों के बंगले, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
अफसरों के बंगले, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Bhopal news: सुप्रीम कोर्ट मास्टर प्लान जारी करने सरकार को निर्देश दे रहा है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।। 2021 की ड्राफ्ट प्रक्रिया पूरी करने के बाद इसमें तालाब किनारे अनुमतियां व अन्य गड़बड़ियों को लेकर तत्कालीन सांसद ने आपत्ति ली और ड्राफ्ट रुक गया। इसके बाद बने 2031 के ड्राफ्ट में लो-लाइन एरिया में अफसरों के दस गुना क्षेत्रफल के आवास भारी पड़े। ये स्थितियां जारी है, जो शहर के नियोजित विकास में बाधा बनी हुई है। एक माह में ड्राफ्ट की बात हो रही है, लेकिन इसमें मिक्स लैंड यूज ही नही, वन-जलस्रोत, तालाब, वन क्षेत्र, बाघ कॉरिडोर, नालों से निर्माण की दूरी, मास्टर प्लान रोड समेत पुराने भोपाल के लिए अलग से प्रावधान करना बड़ी चुनौती।

अब ये नए दावे

अब प्रशासन भोपाल विजन 2047 और ईज ऑफ लिविंग को जोड़कनया मेट्रोपॉलिटन प्लान बनाने का दावा कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जो तंत्र पिछले 20 सालों में 2021 और 2031 का प्लान लागू नहीं कर पाया, वह 2047 का खाका कब तक तैयार करेगा? तब तक राजधानी का विकास कैसे होगा?

प्लान अटकने की ये पांच वजह

  1. संशोधन से बदलाव, प्लान का क्या कामः 2005 के प्लान की का समय खत्म होने के बाद स्मार्ट सिटी, कॉलेज, मॉल और सेंट्रल बिजनेस जोन, वेटलैंड रूल्स के लिए संसोधन कर प्लान में शामिल किया। इससे नया मास्टर प्लान लागू करने की प्रशासनिक इच्छाशक्ति खत्म हो गई।
  2. लो-डेंसिटी में अफसरों के निर्माण, विवाद उठा तो ड्राफ्ट रद्दः 2021 के ड्राफ्ट में तालाब किनारे लो-डेंसिटी जोन में निर्माण, व्यावसायिक गतिविधियों और मैरिज गार्डनों को छूट देने के प्रावधान किए। 2031 के ड्राफ्ट में भी केरवा-कलियासोत में अवैध निर्माण और ग्रीन जोन से छेड़छाड़ हुई। बड़े अफसरों ने लो-डेंसिटी में 600 वर्गफीट की जगह 6000 वर्ग फीट निर्माण कर लिया। इसका विरोध हुआ। ड्राफ्ट वापस ले लिया गया।
  3. अंतिम मुहाने पर सरकार का यू-टर्न: 2031 ड्राफ्ट में संयुक्त संचालक एसएन मिश्रा ने बदलाव किए। ऑनलाइन सुनवाई की। शासन ने आपत्तियों को समायोजित कर अंतिम ड्राफ्ट पर फिर सुझाव आपत्ति की। धारा 19 (3) के तहत अंतिम नोटिफिकेशन के आदेश तत्कालीन पीएस ने जारी कर दिए, लेकिन सरकार के चेहरे बदले। अंतिम अधिसूचना प्रेस में प्रकाशन के लिए भेज ही दी गई थी कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक पत्र जारी कर 5000 आपत्तियों के आधार पर जनता की असहमति बताकर 2047 बनाने की बात कर दी।
  4. एफएआर की बिक्री से बाधाः ग्रीन फिल्ड यानी विस्तारित निवेश क्षेत्र में निर्माण के लिए बेसिफ एफएआर के लिए भी शासन को भुगतान का प्रावधान किया। किनारों पर महज 0.25 एफएआर तय कर ज्यादा निर्माण पर इसकी खरीदी का नियम बनाया, इसका बिल्डर्स ने विरोध भी ड्राफ्ट रद्द होने का सबब बना।
  5. अनुमान के अनुसार नहीं बढ़ी आबादीः 2005 तक प्लानिंग एरिया में 18 लाख आबादी आंकलित की थी. लेकिन ये आबादी 2011 में हुई। 2021 तक के ड्राफ्ट में 26 लाख की आबादी अनुमानित की, जो अभी 2026 में हो रही है। ऐसे में आबादी की तुलना में एक्सपायर प्लान ही उचित लगा और सरकार से लेकर स्थानीय प्रशासन ने रूचि नहीं ली।

हमने शहर के लिए प्लान तय किया था। प्लान में काफी मेहनत करना पड़ती है। शहर विकास के लिए प्लान को लागू करना चाहिए।- वीपी कुलश्रेष्ठ, रिटायर्ड टाउन प्लानर

Updated on:
25 Sept 2026 07:36 am
Published on:
25 Sept 2026 07:36 am