
Bhopal News : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिशुओं और छोटे बच्चों की आंखों से लगातार पानी आने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अभिभावक इसे सामान्य एलर्जी या संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ बच्चों में ये जन्मजात बंद आंसू की नली के कारण होता है। शहर में स्थित भोपाल एम्स के नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और इलाज से अधिकतर बच्चों की समस्या ठीक हो जाती है, लेकिन देर करने पर संक्रमण बढ़ सकता है और गंभीर नेत्र रोग का खतरा भी हो सकता है।
आंसू आंखों को संक्रमण से बचता है। सामान्य स्थिति में ये एक पतली नली के जरिए नाक में चले जाते हैं। कुछ बच्चों में जन्म के समय यह नली पूरी तरह नहीं खुलती, आंसू बाहर नहीं निकल पाते है और आंखों में भरकर गालों पर बहने लगते हैं। इसे जन्मजात ब्लॉक्ड टियर डक्ट कहा जाता है। इस कारण आंखों में पीला या चिपचिपा स्राव दिखाई देता है।
नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार आंखों से लगातार पानी आने से आंखें लाल हो, सूजन या दर्द हो, बार-बार संक्रमण हो, बच्चा तेज रोशनी में आंखें बंद करने लगे, तो यह सामान्य नहीं है। ऐसे लक्षण दुर्लभ मामलों में जन्मजात ग्लूकोमा रोग के संकेत भी हो सकते हैं। समय पर उपचार नहीं होने पर आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है।
AIIMS भोपाल के रेटीना सर्जन डॉ. समनेन्द्र खारकुर ने बताया कि अधिकांश बच्चों में पहले एक वर्ष में आंसू की नली अपने आप खुल जाती है। हल्की मालिश से भी लाभ मिलता है। ९ से 12 महीने तक समस्या बनी रहे, तो प्रोङ्क्षबग प्रक्रिया से बंद नली खोली जाती है। इलाज नहीं होने पर आंखों में मवाद जमने से संक्रमण बढ़ता है। इससे आंखों की रोशनी प्रभावित होती है।
आंखों से कई सप्ताह तक लगातार पानी आए, पीला स्राव निकले, आंख लाल या सूजी हो, बच्चा तेज रोशनी से परेशान हो, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराएं। समय पर इलाज से संक्रमण और दृष्टि की गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।