
Bhopal news:मध्यप्रदेश में भोपाल शहर के प्रमुख रिहायशी इलाके अब शांतिपूर्ण आवास के बजाय अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के गढ़ बनते जा रहे हैं। चौकानें वाली बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार, नोटिस और हंगामे के बावजूद यहां धड़ल्ले से कमर्शियल श्रेणी के नए-नए निर्माण होते ही चले जा रहे है। अरेरा कॉलोनी, कोलार, गुलमोहर और कटारा हिल्स जैसे संभ्रांत और घने आवासीय क्षेत्रों में ये नए कंस्ट्रक्शन पाए गए है।
हैरानी वाली बात यह है कि इस नियम विरुद्ध नेटवर्क को मजबूत करने में निजी भू-माफियाओं से ज्यादा सरकारी विभागों और वित्तीय संस्थाओं की भूमिका सामने आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि रहवासी इलाकों में नियम विरुद्ध कंस्ट्रक्शन को कोई बैंक लोन नहीं देगा, बिजली विभाग कनेक्शन और फूड डिपार्टमेंट लाइसेंस नहीं देगा। जांच में ये सभी दस्तावेज पाए है जिससे अगली सुनवाई में अवगत कराया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की मनाही के बावजूद सरकारी मदद और अनुमतियां देने का क्रम क्यों जारी है। कोर्ट ने इस पर लिखित आदेश में रोक लगाई थी। ये सभी विभाग भी अवमानना के दोषी हैं। - पुर्णेन्दु शुक्ला, रहवासी संघर्ष मोर्चा
केस 1: 10 नंबर मार्केट मेन रोड पर विराट शोरूम के सामने प्लॉट पर कमर्शियल कंस्ट्रक्शन चल रहा है। प्लॉट के मालिक के मालिक गल्फ कंट्री में है और यहां विजय वर्मा अमन ज्वेलर्स यह चार मंजिला निर्माण करवा रहे हैं। दूसरा मकान एनआरआइ सीमा यादव का है। रहवासी संगठन की ओर से पूर्णेन्दु शुक्ला ने शिकायत की है।
केस 2: अरेरा कॉलोनी ई-चन के अर्लंगत 1/32 नंबर प्लॉट पर नक्शा मंजूरी के विपरीत कंस्ट्रक्शन की शिकायत हुई है। शिकायतकर्ता मनीष पिंजानी ने इंजीनियरों को बताया कि यहां शोरूम बनाने की तैयारी है। बिल्डिंग परमिशन शाखा ने भवन स्वामी को नोटिस जारी किए, लेकिन कंस्ट्रक्शन लगातार जारी है।
केस 3: सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता पूर्णेन्दु शुक्ला ने शिकायत में कहा कि अरेरा कॉलोनी के ई-4 सेक्टर के मकान नंबर 96 और 97 में धड़ल्ले से कमर्शियल निर्माण चल रहा है। इस प्लॉट के पीछे और आसपास के मकानों में रहने वाले लोग कई दिनों से दिन रात जारी निर्माण कार्य से परेशान है। एक पड़ोसी ने आयुक्त नगर निगम से उनके घर की दीवारों में दरारें आने तक की शिकायतें की है मगर आज तक इस पर अंकुश नहीं लगा है।
सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट मनाही के बाद भी शहर के रिहायशी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी डेवलपमेंट के लिए बैंकों द्वारा भारी-भरकम लोन बांटे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, बिजली विभाग बिना किसी कमर्शियल अनुमति की जांच किए इन अवैध परिसरों को तुरंत व्यावसायिक बिजली कनेक्शन जारी कर रहा है। वहीं, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (खाद्य विभाग) भी रिहायशी मकानों में खुलने वाले रेस्तरां, कैफे और दुकानों को आंखें मूंदकर फूड लाइसेंस बांट रहा है।
नियम-कायदों को ताक पर रखकर दी जा रही इन अनुमतियों को लेकर अब कानूनी शिकंजा कसने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सीधी अवमानना (कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट) के इस मामले में अब सिर्फ अवैध निर्माण करने वालों पर ही कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि वित्तीय सहायता और सुविधाएं मुहैया कराने वाले बैंक, बिजली विभाग और खाद्य विभाग जैसे संस्थानों को भी कंटेंप्ट हियरिंग में पार्टी बनाया जाएगा।