भोपाल

पत्रिका पड़ताल: भोपाल में 8 हजार पेड़ कटे, अब 80 हजार पौधे लगाने के लिए बजट ही नहीं

Tree Compensation: भोपाल के अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट में काटे गए करीब 8000 पेड़ों की क्षतिपूर्ति के लिए 80 हजार पौधे लगाने की योजना अधर में है, क्योंकि एनएचएआई ने पर्याप्त बजट और एजेंसी तय नहीं की है।
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Oct 09, 2026
बायपास के लिए पेड़ों की क्षति, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
बायपास के लिए पेड़ों की क्षति, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Bhopal news: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में अयोध्या बायपास दस लेन प्रोजेक्ट में काटे गए 8000 पेड़ों की क्षतिपूर्ति अधर में है। जिला प्रशासन ने इसके लिए झिरनिया में 180 एकड़ जमीन खाली करवाकर एनएचएआइ को देने की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन एनएचएआइ ने क्षतिपूर्ति पौधरोपण को लेकर न कोई एजेंसी तय की न पेड़ों की खरीदी व 15 साल तक रखरखाव का बजट दिया। जबकि 8000 पेड़ों की कटाई करने में विभाग को बमुश्किल आठ दिन लगे थे।

स्थिति ये है कि एनएचएआइ इस मामले में पूरी तरह नगर निगम को पेड़ा कटाई के लिए जमा कराए 4.72 करोड़ रुपए के भरोसे हैं। यदि इस राशि से भी पौधे लगाए जाते हैं तो केंद्रीय समिति की शर्तों के अनुसार पौधा लगाना और पंद्रह साल तक उसका रखरखाव करना मुश्किल होगा। इस राशि से 80 हजार पौधे लगाने और पंद्रह साल रखरखाव करने के लिए महज 590 रुपए प्रति पौधा ही निकलेगा, जबकि ये काम करने के लिए प्रति पौधे कम से कम 5000 रुपए का बजट चाहिए। एनएचएआइ के संबंधित अफसर इस मामले में उच्चाधिकारियों से चर्चा करने और निर्देश लेकर काम करने का कह रहे हैं।

ये है क्षतिपूर्ति योजना

-10 गुना क्षतिपूर्ति पौधरोपण करेगा एनएचएआइ , 58 हजार पौधे झिरनिया हुजूर।
-12 हजार पौधे झांगरिया खुर्द हुजूर ।
-10 हजार पौधे एनएच 146 पर आशाराम तिराहा से रत्नागिरी चौराहा तक सड़क़ के दोनों तरफ।
-1000 पौधे नगर निगम के पार्क चिनार, स्मार्टसिटी, मयूर, स्वर्ण जयंती व अन्य।
-6 फीट ऊंचाई के कुल 80 हजार पौधों का रोपण होगा।
-85 हेक्टेयर जमीन राजस्व की है। इसमें पौधरोपण की एनओसी ली है।
-15 साल पर वृक्षों का रखरखाव एनएचएआइ करेगा।

झिरनिया में लगेंगे 58 हजार पौधे

झिरनिया में प्रशासन द्वारा खाली कराई जमीन पर 58 हजार पौधे लगेंगे। यहां 180 एकड़ जमीन खाली कराई थी। प्रति एकड़ 300 पौधे लगाना है। इनकी ऊंचाई छह फीट जरूरी है। 22 हजार पौधे अन्य जगह लगेंगे। इनमें टिंबर वृक्ष जैसे सागौन, शीशम, साखू, महुआ, देवदार, आम, नीम के पौधे लगाना होंगे। नगर निगम ने 7871 पेड़ों की कटाई के एवज में 6000 रुपए प्रति पेड के आधार पर 4.72 करोड़ की राशि जमा कराई थी। क्षतिपूर्ति में 80 हजार पौधों का रोपण हो तो इससे प्रति पौधा 590 रुपए राशि बनती है। इसमें पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदना, मिट्टी तैयार करना, छह फीट ऊंचाई के पौधे की खरीदी करना उसे एक साल तक पानी और खाद से - जीवित बनाए रखना। अगले चार साल तक उसकी सुरक्षा और पानी-खाद की व्यवस्था करना।

ऐसे समझें पौधरोपण का खर्च

6 फीट ऊंचे भारतीय प्रजाति के पौधे जैसे नीम, पीपल, बरगद, जामुन, अमलतास या शीशम को लगाने और उसके 15 साल के रखरखाव का अनुमानित खर्च 3,500 से 6,500 प्रति पौधा आता है। भारतीय देशी प्रजातियां 3 से 4 साल बाद आत्मनिर्भर हो जाती हैं, इसलिए शुरुआती वर्षों के बाद रखरखाव का खर्च काफी कम हो जाता है। शुरुआती चार साल तक औसतन 3500 रुपए प्रति पौधा खर्च बनता है। 3-4 साल में देशी पौधों की जड़े जमीन में काफी गहराई तक चली जाती हैं और वे भूजल खींचने में सक्षम हो जाते हैं। 5000 रुपए प्रति पौधा पंद्रह वर्ष के आधार पर 80 हजार पौधों का खर्च निकाले तो ये 40 करोड़ बनता है।

ये है प्रोजेक्ट

-16 किमी लंबा बायपास।
-04 लेन से बढ़ाकर 10 लेन करना प्रस्तावित ।
-7.5 मीटर- 7.5 मीटर की सर्विस रोड बनेगी।
-836 करोड़ प्रोजेक्ट का बजट।
-08 फ्लाइओवर व 01 रेलवे ओवरब्रिज प्रोजेक्ट में बनेंगे।
-97.79 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा।
-7871 पेड़ों को काटना प्रस्तावित है।

क्षतिपूर्ति पर किए गए सवाल

-80 हजार पौधे छह फीट ऊंचाई के होंगे तो इनकी खरीदी बड़े स्तर पर करना होगी। अब तक इसे लेकर कोई काम नहीं किया गया। इतने पौधे इस समय कौन देने के लिए तैयार है। कहां से ये लाए जाएंगे? एनएचएआइ ने 4.72 करोड़ रुपए के अलावा पौधरोपण का बजट नहीं निकाला है, राशि कौन देगा, कौन इसके लिए जमीनी काम करेगा? इसे लगाने कौन एजेंसी काम तय की जा रही? कौन मॉनिटरिंग करेगा?

-10 हजार पौधे बायपास पर ही लगाना है, इसके लिए भी बायपास पर इस समय कोई जगह नहीं छोड़ी जा रही है।

-1000 पौधे नगर निगम को अपने नगर वन में लगाने हैं, इसकी मॉनीटरिंग कौन करेगा ? ये तय नहीं है।

सीवीसी के निर्देश के अनुसार हम काम करेंगे। विभाग के उच्चाधिकारियों के परामर्श से काम कर रहे हैं। क्षतिपूर्ति पौधरोपण तय शर्तों के अनुसार ही होगा। - देव नुआल, प्रोजेक्ट इंचार्ज, एनएचएआइ

Updated on:
09 Oct 2026 09:47 am
Published on:
09 Oct 2026 09:47 am