9 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सरकारी जमीनों पर कब्जे का बड़ा खेल, MP के 4 शहरों में ’10 हजार करोड़’ की संपत्ति पर अतिक्रमण

Illegal encroachment on land: मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में 10 हजार करोड़ से अधिक कीमत की सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे हैं, जिनमें ज्यादातर धार्मिक ढांचों के नाम पर हुए हैं।
2 min read
Google source verification
जमीन पर कब्जा, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

जमीन पर कब्जा, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Bhopal news: मध्यप्रदेश के 4 बड़े शहरों में 10 हजार करोड़ से अधिक कीमत की जमीनों पर अवैध कब्जा है। इनमें से ज्यादातर धार्मिक ढांचों के नाम पर किए गए हैं। इनमें भी सबसे अधिक कब्जे भोपाल में हुए। जबकि इंदौर, जबलपुर व ग्वालियर भी अछूते नहीं है। बाकी के जिला मुख्यालयों व अन्य शहरों में भी बेशकीमती जमीनें कब्जे में हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इन जमीनों को माफिया के हवाले करने में कई स्थानीय अधिकारियों की सांठगांठ है और सब मिलकर इन जमीनों से कमाई कर रहे हैं। कमाई के तरीके अलग-अलग है। कुछ धार्मिक ढांचों से मिलने वाले चंदे से कमाई कर रहे हैं तो कुछ इन जमीनों पर बने भवनों से विशेष मौकों पर किराया भी वसूला जा रहा है। सरकारी जमीनों का शहर से लेकर गांव तक बुरा हाल है। जिम्मेदार ही इन जमीनों की सुरक्षा से मुंह मोड़कर बैठे हैं।

बन रही जाम की स्थिति

सेवानिवृत्त सहायक भू-अभिलेख अधिकारी ओपी भट्ट का मानना है कि मामला जमीनों से जुड़ा है, इसलिए स्थानीय अधिकारी दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहते। शासन स्तर से भी कोई मुहिम नहीं चलाई जा रही। वन एवं राजस्व मामलों के जानकार अनिल गर्ग का कहना है कि जिला मुख्यालयों व पंचायत स्तर पर भी जमीनों की चिंता में बड़े स्तर पर उदासीनता बरती जा रही है। इतने कब्जे हो चुके हैं कि इन्हें अतिक्रमण मुक्त कराना मुश्किल काम हो गया है। अब ये जमीनें तब तक अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सकती, जब तक कि शासन के स्तर पर कोई मुहिम न चलाई जाए।

अकेले भोपाल शहर में ही सरकारी जमीनों पर कई जगह मुख्य सड़कों से सटकर अतिक्रमण हुए। ऐसी सड़कों पर जाम की स्थिति बन रही है। बागसेवनिया थाने से अमलतास चौराहा होते हुए 11 मिल बायपास के बीच तक ऐसे कई पाइंट है। ये ढांचें मुख्य सड़कों पर बना दिए, जहां कई मौकों पर टेंट-तंबू ताने जा रहे, जिसके कारण जाम लगता है। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस लगानी पड़ रही है, तब भी इन ढ़ांचों को सड़कों के किनारे से नहीं हटाए जा रहे।

पक्के निर्माण, ट्रस्ट भी बना लिए

धार्मिक ढांचों के नाम पर जो कब्जे हो चुके, उनमें से कई ढांचों का संरक्षण करने वाले तथाकथित लोगों ने पक्के निर्माण किए। कुछ ने तो ट्रस्ट व समितियां बना ली। जिनकी मदद से कमाई की जा रही। हाल यह है कि शहर हो या गांव, हर जगह सरकारी जमीन पर कब्जा है।

विशेषज्ञ बोले-शासन खाली कराए सरकारी जमीनें

सरकारी जमीनों पर कब्जे से चिंतित सेवानिवृत्त आइएफएस एके बरोनिया, कर्मचारी नेता अनिल बाजपेयी, रिटायर्ड बैंक मैनेजर शशिकांत यादव व विशेषज्ञ राजकुमार सिन्हा, नितिन सक्सेना का कहना है कि भविष्य में बगैर हरियाली के कुछ भी संभव नहीं है। जहां लैंडबैंक होगा, वहां का पर्यावरण संतुलित होगा। जीवन यापन आसान बना रहेगा। जितने भी कब्जे हुए हैं, सभी को हटाया जाए। शासन को चाहिए कि इसके लिए विशेष मुहिम चलाई जाए।

अवैध कब्जों को संरक्षण देने लगाए बड़े संगठनों के बोर्ड

शहर में कई जगह इन अवैध कब्जों को संरक्षण देने के लिए कुछ तथाकथित बड़े संगठनों के बोर्ड लगाए गए। हालांकि इन अवैध गतिविधियों को संरक्षण दे रहे इन तथाकथित संगठनों की बुरी तरह भद्द पिट रही है। कुछ मामलों में तो ऊपर तक शिकायतें भी हुई हैं। इसके बाद ऐसे संगठनों की बीते दिनों दिल्ली में जमकर क्लास लगी। साफ तौर पर कहा कि किसी भी अवैध ढ़ांचा में बोर्ड लगा मिला तो क्षेत्रीय पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।