
New Electricity Act: बिजली लंबे समय तक बंद हो रही है और शिकायत करने पर भी बहाली नहीं हो पा रही है तो बिजली अधिनियम आपको अघोषित बिजली कटौती पर मुआवजा लेने का हक देता है। अभी इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट एक्ट 2025 में तो मुआवजा ऑटोमेटिक कर दिया जाएगा। यानी लंबे समय तक बिजली गुल होती है तो खुद ही मुआवजा उपभोक्ता के बिल क्रेडिट में जोड़ दिया जाएगा। यदि चार घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बिना पूर्व सूचना के बंद रहती है तो अभी उपभोक्ता फोरम से मुआवजा की मांग कर सकते हैं। 45 दिन में शिकायत का निवारण करना होगा।
जो नियम तय है उनका पालन किया जाएगा। नए बिल में शिकायत व मुआवजे के नियमों का लाभ तय है तो जरूर मिलेगा। - उमाकांत पांडो, सचिव, मप्र विद्युत नियामक आयोग
अभी विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों ने अघोषित या तय सीमा से ज्यादा बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को हर्जाना देने का प्रावधान तय किया है। सामान्य फॉल्ट जैसे फ्यूज उडना या तार टूटना को 1 से 3 घंटे के भीतर ठीक करना होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 4 घंटे का समय तय है। ट्रांसफार्मर जलने पर 12 घंटे में आपूर्ति का समय है। प्रतिघंटा 25 रुपए से 100 रुपए तक है।
नए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 में इस व्यवस्था को और स्पष्ट बनाया जा रहा है। नए संशोधन बिल की धारा 58 में संशोधन के तहत बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और बहाली की बेसलाइन तय की जा रही है। स्मार्ट मीटर में क्षेत्र की बिजली कटौती का डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज होगा।
ग्रामीण इलाकों में 4 घंटे और शहरों में 2 घंटे के भीतर बिजली नहीं आई, तो स्वतः मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा, जो सीधे उनके बिजली खाते या अगले बिल में क्रेडिट होगा। बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां-जहां स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कटने और जुड़ने का समय सीधे कंप्यूटर में दर्ज होगा, जिससे कंपनियों को यह झूठ बोलने का मौका नहीं मिलेगा कि बिजली सिर्फ 10 मिनट के लिए कटी थी।
बिजली कटते ही तुरंत कंपनी के टोल-फ्री नंबर या वाट्सऐप पर शिकायत दर्ज कराएं और शिकायत नंबर रखें। बिजली कब कटी और कितने घंटे बाद आई, इसका रिकॉर्ड रखें। कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती। उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 45 दिनों में समस्या का समाधान करना अनिवार्य है।