रिसर्च में खुलासा, यहां से सबसे जल्दी नुकसान पहुंचाता है कोरोना वायरस।
भोपाल/ मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस को लेकर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। मौजूदा आंकड़ों पर गौर करें, तो अब तक प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 12 हजार के करीब जा पहुंची है। हालांकि, संक्रमम से बचाव को लेकर अबतक दुनियाभर में कई शोध किये जा चुके हैं। इनके जरिये कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी सामने आ चुकी है। इसमें वायरस की प्रकृति, संक्रमण फैलाने के तरीके से लेकर उसके म्यूटेशन यानी रूप बदलने के तरीकों पर कई शोध किये जा चुके हैं।
महत्वपूर्ण है ये रिसर्च
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच एक तरफ इसकी दवा को लेकर वैज्ञानिकों के बीच शोध की जद्दोजहद हैं तो, दूसरी ओर इसकी वैक्सीन तैयार करने को लेकर दुनियाभर की कई कंपनियां जी जान से जुटी हुई हैं। इसी बीच हालही में हुई एक भारतीय रिसर्च में चौंकाने वाली जानकारी साने आई है, जिसे जिसके बारे में मध्य प्रदेश समेत देशभर के लोगों को जानना जरूरी है। वैज्ञानिकों के सुझाव माने जाएं तो कोरोना वायरस के कारण मौत के खतरे के बारे में भी पता लगाया जा सकता है।
प्रदेश में अब तक दो फीसदी मामले
शोधकर्ताओं की मानें तो, कोरोना वायरस नाक से होकर दिमाग की ऑलफैक्ट्री बल्ब तक पहुंचने में सक्षम होता है। ये दिमाग का ऐसा हिस्सा है, जो सांसों की गति यानी लय को कंट्रोल करता है। दिमाग के इस हिस्से के डैमेज होने का मतलब है, कोरोना मरीज की मौत। हालांकि, मध्य प्रदेश में सामने आए अब तक के मामलों में से मात्र 2 फीसदी केसों में ऐसा हुआ है। देशभर में इस तरह के ढाई फीसदी केस ही अब तक सामने आए हैं।
अपने आप में पहली रिसर्च
शोधकर्ताओं के मुताबिक, ये अपने तरह की पहली ऐसी रिसर्च जो कोरोना और दिमाग से मरीज के सांसों का कनेक्शन के संबंध में बताती है। इसमें कोरोना के मरीजों में अन्य अंगों के मुताबिक, फेफड़े सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। वहीं, मरीजों में ब्रेन को भी कोरोना वायरस प्रभावित कर रहा है। शोध टीम में डॉ. प्रेम त्रिपाठी, डॉ. अमित श्रीवास्तव, डॉ. उपासना रे और डॉ. सोनू गांधी शामिल हैं।
ब्रेन से जुड़े लक्षण दिखे तो...
शोधकर्ताओं की इस रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस दिमाग के रेस्पिरेट्री सेंटर ऑफ ब्रेन को पूरी तरह बंद कर सकता है। शोधकर्ताओं की सलाह है कि अगर कोरोना मरीजों में दिमाग से जुड़े लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें तुरंत ही अलग रखना सही विकल्प होगा, ताकि उनपर विशेष नजर रखी जा सके। बताया गया है कि कोरोना से होने वाली मौत की पहली वजह ब्रेन नहीं है, लेकिन इलाज के दौरान मस्तिष्क के रेस्पिरेट्री सिस्टम पर नजर रखने की जरूरत है।