
Safe Click 2.0 : साइबर अपराधियों से बचने की कुंजी डिजिटल रूप से जागरूक होना है। जो नागरिक इस जागरूकता को अपनाएगा, परिवार के सदस्यों को जागरूक रखेगा वह और उसका परिवार कभी साइबर अपराधियों के चंगुल में नहीं फंसेगा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ये बात राज्यव्यापी सायबर जागरुकता अभियान 2.0 के शुभारंभ अवसर पर राजधानी भोपाल के रविंद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साइबर सुरक्षा के 3 सूत्र, जागरूकता, सावधानी और सहभागिता भी बताए कहा कि, साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न हो। कोई अनजान लिंक मिले, कोई डराए धमकाए तो भी रुको, सोचो और फिर निर्णय लो। सीएम ने इस मौके पर साइबर जागरूकता पोस्टर, स्कूली बच्चों के लिए बुकलेट व अभियान का वीडियो लांच किया। यह अभियान 8 जुलाई तक चलेगा। वहीं डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा, डिजिटल डकैती के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं।
सीएम ने साइबर अपराधियों को एक प्रकार से डिजिटल दौर के राक्षस बताया। कहा कि ये दबे पांव लैपटॉप, कम्प्यूटर और मोबाइल के जरिए हमारे साथ डकैती करते हैं। आजकल डिजिटल अरेस्ट, डीप फेक, डेटा ब्रीजिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, रेनसमवेयर अटैक जैसे अनेक प्रकार के साइबर अपराध चर्चाओं है लेकिन साइबर अपराधों के मामले में सावधानी ही बचाव है।
-सीएम ने कहा- लालच और जल्दबाजी से आर्थिक नुकसान।
-प्रदेश में कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का गठन किया है, इसकी मदद लें।
-56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाओं पोर्टल पर उपलॠध है। इन्हें हासिल करने के लिए साइबर अपराधियों के जाल में न फंसे।
डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा कि साइबर अपराध केवल एक आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह सामाजिक विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर विषय है। पिछले कुछ वर्षों में सायबर अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। करीब 80 प्रतिशत शिकायतें विआीय धोखाधड़ी से संबंधित होती हैं। डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल, फर्जी सिमकार्ड, ङयूल बैंक अकाउंट, महिला एवं बच्चों के जुड़े अपराधों की संख्या भी बढ़ी है।
मध्य प्रदेश पुलिस साइबर अपराध पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। इसमें नागरिकों की सावधानी भी बहुत जरूरी है। डीजीपी ने सभी से अभियान में जुड़कर सहयोग करने की अपील की। ये भी बताया कि, 1 लाख रुपए तक की साइबर धोखाधड़ी की ई-जीरो एफआइआर कर न्याय दिला रहे हैं। हेल्पलाइन नङबर 1930 से पीडि़तों को त्वरित सहायता मिल रही है। सायबर धोखाधड़ी के बाद वर्ष 2025 में कुल 135 करोड़ राशि होल्ड कराई गई। पीड़ितों को भी राशि दिलवाई।