MP News: आने वाले दिनों में ईवी खरीदने वाले उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
सुनील मिश्रा
MP News: मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) खरीदने वालों को मिलने वाली बड़ी राहत अब खत्म होने की कगार पर है। इलेक्ट्रिक दो पहिया और चार पहिया वाहनों पर मोटर व्हीकल टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में दी जा रही 100 फीसदी छूट सिर्फ 27 मार्च तक ही लागू है। चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार ने अब तक इस छूट को आगे बढ़ाने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है। ऐसे में 28 मार्च के बाद ईवी खरीदने वाले उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा बनाई गई ईवी पॉलिसी को प्रदेश में 27 मार्च 2025 को लागू किया गया था। इस पॉलिसी को तो पांच साल के लिए लागू किया गया है, लेकिन इसमें दो और चार पहिया वाहनों को मिलने वाली छूट की अवधि केवल एक साल तय की गई थी।
हालांकि ई-बसों और ई-ट्रकों को यह छूट 27 मार्च 2027 तक मिलती रहेगी, क्योंकि इनकी छूट दो साल के लिए लागू की गई थी। ईवी पॉलिसी में पांच साल में सभी दो पहिया वाहनों का 40 प्रतिशत और चार पहिया का 15 प्रतिशत ईवी के पंजीयन का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन एक साल में ही छूट खत्म होने के बाद यह लक्ष्य प्राप्त होना भी मुश्किल होगा।
ईवी पॉलिसी में रेट्रोफिटिंग यानी 15 साल पुराने पेट्रोल-डीजल वाहन को ईवी में बदलवाने पर भी एक साल तक ही छूट की गई है, इसलिए यह भी खत्म हो जाएगी। जबकि अभी तक किट नहीं मिल पाने के कारण रेट्रोफिटिंग का काम ठीक से शुरू भी नहीं हो पाया। क्योंकि पॉलिसी में शर्त है कि ईवी में यह बदलाव ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलोजी द्वारा प्रमाणित तकनीक के साथ होने पर ही छूट दी जाएगी। रेट्रोफिटिंग पर अभी दो पहिया को 5 हजार प्रति वाहन, तीन पहिया को 10 हजार और कार को 25 हजार प्रोत्साहन राशि घोषित की गई है।
पॉलिसी में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों को मिलने वाले वित्तीय प्रोत्साहन पर समय का बंधन नहीं है बल्कि संख्या का बंधन है। छोटे स्टेशन के चार्जर्स पर पूंजीगत सब्सिडी 30 प्रतिशत जो उपकरण और मशीनरी के मूल्य का पहले 500 चार्जिंग स्टेशन को ही मिलेगी, अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपए रहेगी। मध्यम चार्जिंग स्टेशन के लिए 30 प्रतिशत सब्सिडी, अधिकतम 3 लाख रुपए की सहायता पहले 300 स्टेशनों को मिलेगी। बड़े स्टेशन में पहले 200 स्टेशनों को ही अधिकतम 10 लाख रुपए तक सब्सिडी मिलेगी। बैटरी स्वैपिंग स्टेशन में पहले 300 स्टेशनों को ही अधिकतम 5 लाख तक सब्सिडी दी जाएगी।
ईवी खरीद महंगी: 100 प्रतिशत मोटर व्हीकल टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क छूट खत्म होने से उपभोक्ता पर अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा।
ईवी बिक्री प्रभावित: लागत बढऩे से लोग पेट्रोल-डीजल वाहनों की ओर लौट सकते हैं।
सरकार का लक्ष्य प्रभावित: 5 साल में 40 प्रतिशत दो पहिया और 15 प्रतिशत चार पहिया ईवी का लक्ष्य मुश्किल हो सकता है।
रेट्रोफिटिंग योजना: किट उपलब्धता पहले ही सीमित है, प्रोत्साहन खत्म होने से पुराने वाहनों को ईवी में बदलने का उत्साह घटेगा।
बाजार में अनिश्चितता बढ़ेगी: कंपनियां और डीलर बिक्री रणनीति तय नहीं कर पाएंगे।
पर्यावरणीय लक्ष्य: प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की गति धीमी पड़ सकती है।
नीति की विश्वसनीयता: पांच साल की पॉलिसी में केवल एक साल की राहत खत्म होने से निवेशकों और उपभोक्ताओं में भ्रम बनेगा।