Health news: हेल्पलाइन पर कुल कॉल्स में से 24 प्रतिशत कॉल्स में बच्चे मानसिक तनाव का शिकार पाए गए....
Health news: केवल बड़े ही नहीं, बच्चे भी किसी न किसी रूप में चिंता में डूबे हुए हैं। चाहे पढ़ाई या कॅरियर की चिंता हो या माता-पिता, शिक्षकों की डांट का डर। किशोर और युवा भी किसी न किसी रूप में मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। प्रदेश में किशोर और किशोरियों को मानसिक व शारीरिक समस्याओं से निजात दिलाने '104' हेल्पलाइन अहम साबित हो रहा है।
हाल ही में हेल्पलाइन का संचालन करने वाली कंपनी की ओर से जारी वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में 26 हजार से ज्यादा किशोरों ने विशेषज्ञों से अपनी उलझन सुलझाने के लिए मदद मांगी है।
हेल्पलाइन पर कुल कॉल्स में से 24 प्रतिशत कॉल्स में बच्चे मानसिक तनाव का शिकार पाए गए। इस तनाव का कारण मुख्य रूप से परीक्षा का दबाव, कॅरियर की चिंता, पारिवारिक कलह और आपसी दोस्ती में मनमुटाव है। साल भर में लगभग 4,588 किशोरों की काउंसलिंग की गई, ताकि उन्हें अवसाद और डर के साये से बाहर निकाला जा सके। हेल्पलाइन को मिली कॉल्स में से 35 प्रतिशत मामले तनाव, 30 प्रतिशत शारीरिक समस्याएं, 12 प्रतिशत करियर संबंधी उलझनों और 11 प्रतिशत यौन समस्याओं से संबंधित थे।
महारानी लक्ष्मी बाई पीजी कॉलेज में छात्राओं के लिए मन मित्र बॉक्स की पहल शुरू की गई है। काउंसलर अनीता पुरी बताती हैं, सप्ताह या माह में बॉक्स खोलकर ओपन फोरम में समाधान बताया जाता है। फिलहाल 20-25 छात्राएं नियमित रूप से बिना नाम लिखे अपनी बातें साझा कर रही हैं। नूतन कॉलेज में भी काउंसलिंग सेल है।
मैं पढ़ाई में ठीक हूं, लेकिन हर समय डर लगता है कि कहीं माता-पिता की उम्मीदों पर खरी न उतर पाऊंगी। यह सोचकर मुझे घबराहट होने लगती है। पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पाती हूं। यह कहना है शहर के एक पीजी कॉलेज में अध्ययरत छात्रा का। नेहा (परिवर्तित नाम) पिछले कुछ महीनों से लगातार तनाव, अनिद्रा और घबराहट से जूझ रही थी। कॉलेज काउंसलिंग सेल में उसने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी। काउंसलर से बातचीत के बाद अब वह राहत महसूस कर रही है। बाबूलाल गौर भेल पीजी कॉलेज के काउंसलर राजेंद्र जैन के अनुसार हर सप्ताह 20-25 छात्र काउंसलिंग के लिए आते हैं। इनमें प्लेसमेंट, नौकरी और पारिवारिक अपेक्षाओं को लेकर तनाव प्रमुख है।
ओपीडी में आने वाले 10 में से 6 मरीज डिप्रेशन या सेक्स संबंधी विकारों से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में 104 हेल्पलाइन जैसे मंच किशोरों को बिना किसी डर के अपनी बात रखने का सुरक्षित माध्यम प्रदान कर रहे हैं। कंपनी के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
सूचना एवं जानकारीः 10,428
मेडिकल सलाह: 4,792
काउंसलिंगः 3,888
शिकायतें: 3,113