
Fake IAS Tripti Singh Rajput: आइएएस अधिकारी होने का झांसा देकर ठगी करने वाली भोपाल की तृप्ति सिंह का 50 लाख की ठगी का एक और मामला (Fake IAS fraud case) सामने आया है। उसके खिलाफ उसने पर्यटन विकास निगम के होटल लीज पर दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने का मामला बागसेवनिया थाने में दर्ज किया गया है। उसके खिलाफ यह चौथी और भोपाल की दूसरी एफआइआर है।
इस मामले में उसके साथ ही भाई सुधांशु सिंह और साथी प्रखर सिंह को भी नामजद किया गया है। तृप्ति फिलहाल अशोकनगर जेल में बंद है। बागसेवनिया पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर भोपाल लाने की तैयारी कर रही है। टीआइ अमित सोनी का कहना है कि पूछताछ में ठगी के नेटवर्क व अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है। बताया गया कि इस गिरोह ने भोपाल में कई अन्य लोगों को चूना लगाया है।
कारोबारी गगन से खुद को पर्यटन निगम की असिस्टेंट डायरेक्टर बताकर तृप्ति ने पंचमढ़ी, तवा और रातापानी के निगम के होटल व रिसॉर्ट की कम राशि में लीज पर दिलाने का प्रस्ताव दिया। उसके भाई सुधांशु और साथी प्रखर सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए गगन को भरोसा दिलाया।
पुलिस जांच में आया है कि तृप्ति के झांसे में आने के बाद गगन ने अलग-अलग समय पर नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 49.96 लाख रुपए दिए। इसमें 14 दिसंबर 2025 को 17 लाख 23 फरवरी को 13 लाख और 31 मार्च को 15 लाख रुपए नकद दिए गए। शेष राशि ऑनलाइन भुगतान की गई।
बागसेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी ने बताया कि गगन उपवंशी (31) सिवनी में रहते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया, अगस्त 2025 में रिश्तेदार रोहित के माध्यम से उनकी मुलाकात तृप्ति सिंह और उसके भाई सुधांशु सिंह से हुई थी। तृप्ति ने खुद को आइएएस अधिकारी और एमपीटी में एडिशनल डायरेक्टर बताया। पहचान का हवाला देकर उसने गगन का भरोसा जीत लिया।
बता दें कि, पुलिस ने कुछ दिन पहले जब तृप्ति सिंह राजपूत के भोपाल स्थित मायके और ससुराल में छापेमारी की थी। इस छापेमारी में पुलिस को लोगों पर रौब झाड़ने और खुद को बड़ा अधिकारी साबित करने आरोपी के घर में फर्जी अवॉर्ड और ट्रॉफियां मिली। आरोपी के ससुराल (अलकापुरी) से पुलिस ने सुनहरे रंग की ट्रॉफी (मोमेंटो) जब्त की। लकड़ी व सुनहरे रंग की शील्ड पर बकायदा अशोक स्तंभ लगा हुआ है। शील्ड पर बड़े अक्षरों में लिखा था 11 जनवरी से 26 जनवरी 2024, डॉ. तृप्तिसिंह यंगेस्ट ऑफिसर ट्रेनी प्रोफेसर ऑफ मप्र। यह फर्जी ट्रॉफी लोगों को विश्वास दिलाने थी कि वह एक सम्मानित अधिकारी है।