
MP Farmers :मध्य प्रदेश में खाद की किल्लत को लेकर जारी चर्चाओं के बीच अब राज्य सरकार की ओर से स्पष्टीकरण सामने आया है। सरकार ने साफ किया कि, प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है, हमारे पास खाद का पर्याप्त भंडारण है। मौजूदा समय में बंद बिक्री पर सफाई देते हुए कहा गया कि, रिटेलर के स्टॉक का मिलान किया जा रहा है, जिसके चलते 3 दिनों के लिए इसे बंद किया गया है। हालाकि, 17 अगस्त यानी सोमवार से एक बार फिर खाद की बिक्री शुरू कर दी जाएगी। साथ ही 20 अगस्त से प्रदेशभर में 'हर किसान, हर घर, हर खेत खाद अभियान' की शुरुआत की जाएगी।
सरकार की ओर से ये भी कहा गया कि, किसानों को सुगमता से उर्वरक वितरण को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के आईएफएमएस पोर्टल और प्रदेश के उर्वरक विक्रेता (रिटेलर) के स्टॉक का मिलान करने के लिये 14 अगस्त की शाम 7.00 बजे से उर्वरक विक्रय 15 और 16 अगस्त को अवकाश के दिनों में बंद रखा गया है, जिसे सोमवार 17 अगस्त से यथावत शुरु किया जाएगा।
स्टॉक के मिलान का काम लगातार और तेजी के साथ किया जा रहा है। आज 16 अगस्त की शाम तक इस कार्य को पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही सोमवार 17 अगस्त से खाद वितरण का कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। इसमें किसानों को असुविधा नहीं होगी। यानी किसान को 17 अगस्त से जितनी भी खाद की आवश्यक्ता होगा, उन्हें मिल सकेगी। साथ ही, आगामी 20 अगस्त से 'हर किसान हर घर, हर खेत खाद' अभियान भी शुरू किया जा रहा है, जिससे रबी की खाद इसी महीने से किसानों को मिलने लगेगी।
इस संबंध में सचिव कृषि निशांत वरवड़े का कहना है कि, प्रदेश में रासायनिक उर्वरको का पर्याप्त भंडारण है, 01 अप्रैल से अब तक यूरिया की कुल उपलब्धता 17.04 लाख मीट्रिक टन थी, जिसमें से 12.83 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उठाव किसानों से किया गया हैं। मौजूदा समय में राजकीय भंडारण में 4.21 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता है, जबकि बीते साल इसी समय यूरिया की उपलब्धता 1.60 लाख मीट्रिक टन थी।
प्रदेश में 01 अप्रैल से अब तक डीएपी और एनपीके की कुल उपलब्धता 11.20 लाख मीट्रिक टन थी, जिसमें से 7.09 लाख मीट्रिक टन का उठाव किसानों द्वारा किया गया है। मौजूदा समय में 4.10 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता है, जबकि बीते साल इसी समय डीएपी + एनपीके की उपलब्धता 3.00 लाख मीट्रिक टन थी।
इसके अलावा, प्रदेश में 01 अप्रैल से अब तक एसएसपी की कुल उपलब्धता 6.78 लाख मीट्रिक टन थी, जिसमें से 3.61 लाख मीट्रिक टन का उठाव किसानों द्वारा किया गया है, मौजूदा समय में 3.17 लाख मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है।