
udayan das akanksha sharma case- भोपाल के उदयन दास ने कोलकाता की आकांक्षा शर्मा की हत्या कर शव को चबूतरे में बंद कर दिया था। (file photo enhance chat gpt)
Udayan Das Akanksha Sharma Case: भोपाल के शक्तिनगर का वो घर, जिसके कमरे में पलंग की जगह बना सीमेंट का चबूतरा बिल्कुल सामान्य सा नजर आता है, लेकिन पुलिस को क्या पता था कि इसी चबूतरे के नीचे एक युवती का शव दबा है। 2 फरवरी-2017 में जब पुलिस ने इस चबूतरे को तोड़ा तो आकांक्षा शर्मा हत्याकांड का ऐसा राज खुला, जिसके बाद इसकी जांच ने हत्यारे उदयन दास को बेनकाब कर दिया…।
उदयन दास। यह वो नाम है जिसने अपने कारनामों से देशभर को दहला दिया था। प्रेम की तलाश में कोलकाता से भोपाल आई उस लड़की को नहीं मालूम था कि वो ऐसे जंजाल में फंस जाएगी, जिसके बाद कभी बाहर नहीं आ पाएगी। इस मामले में उदयन दास का ऐसा घिनोना चेहरा सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया। जांच आगे बढ़ी तो उदयन से जुड़े तीन हत्याकांड का खुलासा हुआ। यदि बांकुड़ा पुलिस आकांक्षा को ढूंढते हुए भोपाल नहीं पहुंचती तो शायद उदयन दास खुला घूम रहा होता।
भोपाल में 24 अप्रैल 1984 को पैदा हुआ उदयन दास 10वीं तक पढ़ाई भोपाल में करने के बाद 12वीं पढ़ने के लिे रायपुर चले गया था। भिलाई के रूमता कालेज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की, लेकिन थर्ड ईयर में फेल हो गया था। भोपाल का उदयन दास और कोलकाता के बांकुड़ा की आकांक्षा शर्मा की मुलाकात 2007 में Orkut के जरिए हुई थी। इसके बाद दोनों की मुलाकात जयपुर में हुई। जहां उदयन ने बताया कि वो आईआईटी पासआउट है और उसके पास अमेरिका की नागरिकता है। यह कहकर ही संभवतः उदयन ने आकांक्षा का भरोसा जीता था। आकांक्षा ब्वायफ्रेंड के प्रेम में उलझती गई। 9 साल तक दोनों का प्रसंग चला। उदयन अपनी गर्लफ्रेंड से कहता था कि उसके पास समय बहुत कम है, वो थोड़े दिन तुम्हारे साथ रहना चाहता है, उसके बाद अमेरिका चले जाउंगा। लेकिन जब आकांक्षा फ्लाइट से मिलने पहुंचती, उसके बाद अमेरिका जाने की बजाय उदयन भोपाल वापस आ जाता था। एक बार जून 2016 को कोलकाता के बांकुड़ा की लड़की सबकुछ छोड़कर अपने प्रेमी से मिलने निकल आई। दोनों दिल्ली में मिले, फिर भोपाल चले आए। दोनों लिव-एन में रहने लगे थे। उदयन ने उसे बताया था कि उसके माता-पिता नहीं हैं। भोपाल के शक्ति नगर में रहने वाले दो मंजिला मकान में उदयन अकेले ही रहता है। उसके अमेरिका जाने वाला झूठ आकांक्षा को समझ आने लगा था।
14 जुलाई 2016 को दोनों में जमकर विवाद हुआ था। आकांक्षा किसी से फोन पर बात कर रही थी, इस बात को लेकर दोनों में झगड़ा हुआ था। आकांक्षा कहती थी मेरे साथ धोखा हुआ है। उदयन की हरकतें देख आकांक्षा परेशान रहने लगी थी। पुलिस जांच में सामने आया था कि इसी दौरान आकांक्षा की हत्या की प्लानिंग कर ली थी। दोनों के रिश्ते इतने खराब हो गए थे कि उदयन ने घर में ही आकांक्षा की आवाज हमेशा के लिए बंद कर दी। इसके बाद टीन की बड़ी पेटी में बंद कर सीमेंट का चबूतरा घर में ही बना दिया। क्राइम सीरियल देखने के शौकीन उदयन ने बाद में जो खुलासे किए वो हैरान करने वाले थे। वो घर में बने उसी चबूतरे पर सोता था और कॉलगर्ल को भी घर लेकर आता था। उधर, कोलकाता में आकांक्षा के माता-पिता परेशान थे। उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी गई थी। कोलकाता पुलिस आकांक्षा की तलाश में जुटी थी।
कोलकाता की बांकुड़ा पुलिस काफी समय से आकांक्षा की लोकेशन ट्रैक कर रही थी। बांकुड़ा पुलिस भोपाल पहुंची, लेकिन जिस लड़की की तलाश में टीम आई थी, उसका कोई पता नहीं चला। घर में उदयन मौजूद था, लेकिन आकांक्षा कहीं नहीं थी। जांच उस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी थी, जहां पुलिस के पास शक था, मगर ठोस सबूत नहीं। पुलिस ने आकांक्षा और उदयन की कॉल डिटेल भी खंगाली। उदयन पर शक गहराता गया और 2 फरवरी 2017 को भोपाल की गोविंदपुरा पुलिस के सहयोग से उदयन दास को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी दिन शुरू हुई थी घर की तलाशी, जिसमें चबूतरे को देख पुलिस ने खुदाई कराई थी। जिसमें गुमशुदा आकांक्षा शर्मा का शव बाहर निकाला गया। इस मामले में उदयन ने आकांक्षा की हत्या किस तारीख को की थी, इसे लेकर पुलिस भी निश्चित तारीख नहीं बता पाई है।
उदयन से लगातार पूछताछ में हर दिन नए खुलासे होने लगे। उदयन का एक और कारनामा सभी के सामने था। पूछताछ के बीच पुलिस ने उदयन के पिता वीरेंद्र दास और मां इंद्राणी के बारे में पूछताछ की। वो कहता था कि मां अमेरिका में रहती थी, पिता बीमारी से गुजर गए। हत्या के बाद 7 सालों तक वो माता-पिता की पेंशन से जीवन गुजार रहा था। सख्ती हुई तो इस खुलासे ने देशभर की नींद उड़ा दी। उदयन ने बताया कि 2010 में रायपुर में उसने अपने माता-पिता की हत्या कर दी थी। बाद में मकान बेच दिया गया था। पुलिस ने रायपुर के उसी घर में गड्ढा खोदकर अवशेष निकाले थे।
इस केस में पश्चिम बंगाल की बांकुड़ा पुलिस ने 30 अप्रैल 2017 को 600 पन्नों की केस डायरी कोर्ट में पेश की थी। 19 गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने दोषी पाया था। बांकुड़ा में फास्ट ट्रैक कोर्ट में उदयन दास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके बाद रायपुर जिला न्यायालय ने भी माता-पिता की हत्या कर शव घर में दफनाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस तरह एक गुमशुदगी की जांच ने तीन हत्याओं के रहस्य से पर्दा उठाया दिया। उदयन दास अब पश्चिम बंगाल की एक जेल में सजा काट रहा है।
Updated on:
30 Sept 2026 04:14 pm
Published on:
30 Sept 2026 04:01 pm
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