
Bhopal news: एमपी में भोपाल शहर के एमपी नगर, रेलवे स्टेशन, नादरा बस स्टैंड और कोचिंग हब इलाकों में हर दोपहर और शाम एक ही नजारा दिखता है… 50, 60 या 80 रुपए में भरपेट भोजन के बोर्ड। शहर के 1,700 छोटे-बड़े ढाबों, मेस और रेस्टोरेंट में रोजाना 85,000 छात्र, कामकाजी लोग यही सस्ती थाली खाते हैं। इतनी कम कीमत में शुद्ध और पौष्टिक खाना मिलना क्या मुमकिन है ? कोई सवाल नहीं पूछता। खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया कार्रवाई और पड़ताल में ये थाली संदिग्ध श्रेणी में आ गई है। सेहत के लिए बेहद चिंताजनक है।
अशोका गार्डन की इकबाल कॉलोनी में रहने वाले रियाज अली का कहना है कि रोजाना अस्सी फीट की होटल से ही खाना खाते हैं। उन्हें अपच और पेट में दिक्कत रहने लगी है। बीटेक कर रहे छात्र मोहित कहते हैं कि हाल में उन्हें उल्टी- दस्त हुई और गैस्ट्रोएंटेराइटिस की समस्या हो गई। अशी होटल का खाना बंद किया हुआ है। खुद ही व्यवस्था करते हैं।
कुकिंग ऑयल को बार-बार गर्म करने से उसमें कार्सिनोजेनिक यानी कैंसर पैदा करने वाले तत्व बनते हैं, जो पेट और आंतों के कैंसर का कारण बन सकते हैं। सिंथेटिक पनीर, यूरिया और रासायनिक रंगों को फिल्टर करने में लिवर और किडनी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे कम उम्र में ही अंग काम करना बंद कर सकते हैं। घटिया पाम ऑयल और ट्रांस फैट्स के सेवन से धमनियों में ब्लॉकेज और कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ता है।
-एमपी नगर चेतक ब्रिज के पास गौतम नगर की ओर छोटे ढाबे-रेस्टोरेंट में दुकान के बाहर ही रोटियां सेकी जा रही हैं। खाद्य एवं सुरक्षा मानक के नियम कि मुख्य रोड या खुले में किचन है न हो, लेकिन यहां सबकुछ खुले में है। खाना बनाने वाले कर्मचारियों के सिर पर न कैप दिखाता है और न ही हाथों में ग्लव्ज।
-कोलार सिक्सलेन किनारे बंजारी-बीमाकुंज के बीच रेस्टोरेंट में भी ऐसे ही हाल है। यहां बताया गया कि पुराने शहर की मिल से आटा लाते हैं। ये बिल्कुल मैदे की तरह है। किस क्वालिटी के गेहूं का है, दुकानदार को पता नहीं।
-अशोका गार्डन 80 फीट रोड पर लाइन से पांच होटल्स है। यहां ग्रेवी अलसुबह ही बना दी थी। जो जैसी सब्जी मांग रहा है, इसी सुबह की ग्रेवी में छौंक मारकर बना दिया जाता है
-थोक मंडी व हाट से बची हुई सब्जियों को बेहद कम दामों में खरीदा जाता है। इन्हें ही पूरे दिन उपयोग करते हैं।
-एक ही कुकिंग ऑयल में बार-बार तलने का काम किया जाता है। जब तेल गाढ़ा और काला हो जाता है, तब भी उसे फेंकने के बजाय नई सब्जी की ग्रेवी में मिला दिया जाता है।
-असली दूध के पनीर की जगह पाम ऑयल, अरारोट से बने सस्ते पनीर का उपयोग होता है।
-अरारोट- स्टार्च का उपयोग कर दाल को गाढ़ा किया जाता है। पानी में सिर्फ हल्दी, नमक और घटिया स्टार्च मिलाकर दाल को गाढ़ा रूप दिया जाता है।
-खुले मसाले इस्तेमाल होते हैं जिनमें बुरादा, केमिकल व अन्य तरह की मिलावट की आशंका रहती है।
जिला नियंत्रक खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण पंकज श्रीवास्तव के अनुसार नियम है कि हर भोजन विक्रेता को एफएसएसएआइ रजिस्ट्रेशन दुकान पर अलग-अलग जगह पर चस्पा करना चाहिए, ताकि उपभोक्ता को दिखे। होटल में जाकर इस रजिस्ट्रेशन को जरूर देखें। यदि बिना कैप, ग्लव्ज व स्वच्छता के खाना बन रहा है तो इसकी शिकायत खाद्य विभाग को उनके एप या पोर्टल पर जाकर करें। नियमानुसार होटल में स्वच्छ रसोई और कर्मचारियों का मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट रखना अनिवार्य है। अत्यधिक तीखे, चमकीले लाल या पीले रंग वाली सब्जी/ग्रेवी से बचें।