Freehold Property Order : मध्य प्रदेश शासन द्वारा साल 2016 में आदेश जारी करते हुए कहा था कि नगरीय निकायों की जिन संपत्तियों की लीज 30 साल या उससे अधिक हो चुकी है, उन्हें 'फ्री होल्ड' किया जाए।
Freehold Property Order :मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल नगर निगम ( Bhopal Municipal Corporation ) के अंतर्गत आने वाली वो संपत्तियां जल्द ही 'फ्री होल्ड' ( Freehold Property ) होने जा रही हैं, जिनकी लीज 30 साल या उससे ज्यादा की मियाद पूरी कर चुकी है। इन संपत्तियों में दुकान, मकान और प्लॉट को शामिल किया गया है। इस संबंध में एक स्थायी आदेश ( standing orders ) नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायन ( Bhopal Municipal Corporation Commissioner Harendra Narayan ) द्वारा जारी किया गया है।
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश शासन की ओर से 24 फरवरी 2016 को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कहा गया था कि नगरीय निकायों की जिन संपत्तियों की लीज 30 साल या उससे ज्यादा हो चुकी है, उन्हें फ्री होल्ड किया जाए। इस आदेश का शासन द्वारा राजपत्र में भी जारी कराया गया था, लेकिन निगम ने इस नियम का पालन नहीं किया। इस नियम में 4 मई 2021 को संशोधन किया गया लेकिन निगम ने लीज संपत्तियों को फ्री होल्ड करने के बजाए लीज नवीनीकरण करना बेहतर समझा।
इसके बाद 28 मार्च 2023 को इस नियम में एक संशोधन और किया गया। तब कहीं जाकर निगम ने नियम के तहत 30 साल की लीज पूरी कर चुकी संपत्तियों को फ्री होल्ड करने की कवायद शुरू हो सकी है। इसके तहत निगम आयुक्त हरेंद्र नारायन ने 5 जून को एक स्थायी आदेश जारी किया है।
फ्री होल्ड संपत्ति एक आम व्यावसायिक भूमि के निर्माण और बिक्री तक स्वामित्व के एक प्रकार को संकेत करता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति या संगठन जिसके पास ये जमीन है वो उसके मालिक हैं और उसे विपणन और विनियमित कर सकते हैं, जैसे वो चाहें। इस तरह की संपत्ति पर निर्मित इमारतों के मालिकाना अधिकार होते हैं। फ्री होल्ड जमीन के मालिक को जमीन बेचने, संवितरित करने, दान करने या वस्त्राधिकारी किसी अन्य को जमीन पर निर्माण करने की अनुमति होती है। इसले उलट लीज होल्ड जमीन एक तरह की भूमि होती है जिसे किसी अन्य व्यक्ति या संगठन को निर्माण या इस्तेमाल करने अनुमति नहीं रहती, उसके इस्तेमाल का मालिकाना हक नहीं होता। ऐसी संपत्ति पर एक निर्धारित समयावधि के बाद मालिकाना हक वापस ले लिया जाता है।
-फ्री होल्ड प्रोपर्टी वो भूमि होती है, जिसका पूरा स्वामित्व और नियंत्रण उसके मालिक के पास होता है।
-इसमें किराया देने की कोई अवधि नहीं होती और मालिक इसे खुद इस्तेमाल कर सकता है या इसे बेच भी सकता है।
-फ्री होल्ड प्रोपर्टी के मालिक के पास भूमि के स्वामित्व, निर्माण, विपणन और इस्तेमाल का पूरा कंट्रोल होता है।