
Bhopal news: मप्र पुलिस ने खाकी में रील के बढ़ते चलन पर लगाम कसना शुरू कर दी है। पीएचक्यू ने सोमवार की देर शाम रील्स पर गाइडलाइन जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि अफसर हों या जवान सभी को कायदे में रहना होगा। दरअसल, सोशल मीडिया पर रील्स को लेकर मप्र पुलिस कई बार ट्रोल हो चुकी है। इतना ही नहीं कई अधिकारियों में रील्स की ऐसी सनक तक देखी जा रही है कि वे लाइक और फॉलो के चक्कर में अनुशासन को भी ताक पर रख देते हैं।
वहीं सोशल मीडिया से होने वाली आय के चलते ड्यूटी छोड़कर खुद की ब्रांडिंग कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो मप्र पुलिस में रील्स को लेकर लगातार सामने आ रहे मामलों के चलते सख्त कदम उठाए गए हैं। आइपीएस से जवानों तक रील्स का ऐसा क्रेज है कि सभी सोशल पुलिसिंग को सोशल मीडिया में बदल चुके हैं। कई बार लोग इनके वीडियो की तारीफ करते हैं तो कई बार पुलिसकर्मी मर्यादा ही लांघ जाते हैं। आइए कुछ ऐसे पुलिसकर्मियों के बारे में बताते हैं जिन्होंने वर्दी के बदौलत लाखों फॉलोअर्स तैयार किए और उससे पैसे भी कमा रहे हैं।
सचिन अतुलकर, आइजी, चंबल
अपनी फिटनेस को लेकर सुर्खियों में रहने वाले आइपीएस अतुलकर सोशल मीडिया में भी काफी लोकप्रिय हैं। फेसबुक से ले इंस्टाग्राम में इनका अकाउंट है। फिल्मी गानों पर वर्दी के साथ तस्वीरें साझा की जाती हैं। जिसकी चर्चा पुलिस मुख्यालय तक रहती है।
अनु बेनीवाल, एसीपी, जबलपुर
आइपीएस अनु बेनीवाल अभी एडिशनल एसपी जबलपुर में पदस्थ हैं। इंस्टाग्राम में इनका वेरिफाइड अकाउंट है। जिसे 1.38 लाख लोग फॉलो करते हैं। अनु सोशल मीडिया में लगातार सक्रिय रहती हैं और अपने जीवन से जुड़े पहलुओं को साझा करती रहती है।
विवेकानंद तिवारीः ट्रैफिक कॉस्टेबल
विवेकानंद भी ट्रैफिक से जुड़े विषयों पर चौक-चौराहों पर वीडियो बनाते हैं। इसी साल सोशल मीडिया रील्स और बिना बताए गायब रहने पर विवादों में आए थे। 3 जून 2026 को एसपी ने निलंबित भी किया। इसके बाद विवेकानंद का नौकरी से त्यागपत्र देने का मामला भी सुर्खियों में था।
मप्र पुलिस मुख्यालय ने सोशल मीडिया को लेकर 24 बिंदुओं की नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या बाद में वर्दी अथवा अशोभनीय वेशभूषा में रील, फोटो, वीडियो या ऑडियो पोस्ट नहीं कर सकेंगे। पहले से मौजूद अनुचित कंटेंट हटाने के निर्देश भी हैं। सरकारी, गोपनीय या संवेदनशील दस्तावेज, केस डायरी, जांच रिपोर्ट और खुफिया जानकारी चैट जीपीटी समेत किसी एआई प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने पर रोक है।
गिरफ्तारी, छापे और जांच से जुड़ी जानकारी भी निर्धारित सीमाओं में ही साझा की जा सकेगी। संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अपने कार्यस्थल और ड्यूटी की प्रकृति सार्वजनिक नहीं करेंगे। निजी सोशल मीडिया के लिए सरकारी सीयूजी सिम/संसाधनों के इस्तेमाल पर भी रोक है। इन नियमों के उल्लंघन पर पुलिस रेगुलेशन एक्ट और सिविल सेवा आचरण संहिता के तहत कारण बताओ नोटिस से अनुशासनात्मक कार्रवाई और गंभीर मामलों में निलंबन तक हो सकती है।
-सोशल मीडिया से नियम विरुद्ध आय विवरण 30 दिन के भीतर विभाग को देना है।
-संदिग्ध, असामाजिक छवि या आपराधिक रिकॉर्ड वालों को न फॉलो करें न जोड़े।
-सफलता को पुलिस बल की उपलब्धि के रूप में पेश करना होगा, न कि व्यक्तिगत ।
-परिजन या मित्र वर्दी, वाहन या सरकारी अस्त्र-शस्त्रों के साथ फोटो/वीडियो न डालें।
-कामकाज के समय व्यक्तिगत उपयोग नहीं।