भोपाल

MP में धार्मिक ढांचों की आड़ में सरकारी जमीनों पर कब्जा, जनप्रतिनिधियों से लेकर कलेक्टर तक ने साधी चुप्पी

MP Government land encroachment: मध्यप्रदेश में सरकारी जमीनों पर धार्मिक ढांचे बनाकर कब्जे का आरोप है। भोपाल में 5000 से ज्यादा ढांचे सामने आए हैं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
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Oct 06, 2026
government land encroachment through religious structures
Government Land Encroachment: धार्मिक ढांचों की आड़ में एमपी हो सरकारी जमीनों पर हो रहे कब्जे (फोटो सोर्स- Magnific)

Government land encroachment: मध्यप्रदेश में सरकारी जमीनें हथियाने के लिए धार्मिक ढांचा निर्माण का सहारा लिया जा रहा है। राजधानी भोपाल में ही 5000 से ज्यादा ढांचे सरकारी जमीनों पर बनाए जा चुके हैं। 75 फीसदी ढांचों में कई क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की मौन सहमति है। कुछ मंत्री, सांसद और बिधायक तो इनके निर्माण में पैसे तक खर्च कर रहे हैं तो कुछ इन्हें संरक्षण देने के लिए खुद के नेमप्लेट लगी बेंच व लाउड स्पीकर दान कर रहे हैं। भोपाल समेत पूरे प्रदेश में बुरी तरह सरकारी जमीनों की बंदरबांट का खेल जारी है।

प्रदेश के कई जिलों में ये हाल है कि धार्मिक ढांचों के नाम पर सड़कें ही घेरी जा रही हैं। नए भोपाल में जमीने हथियाने वाले इन ढांचों का बड़े स्तर पर सहारा ले रहे हैं। नर्मदापुरम रोड क्षेत्र में मुख्य मार्गों पर खुद के प्रतिष्ठान के सामने धार्मिक ढांचे बना लिए, ताकि उनके नाम पर खुद का कारोबार किया जा सके। एक नई बनाई गई 80 फीट सड़क तो ऐसी है, जिस पर पांच किमी के दायरे में पांच वांचे बनाए गए, जो किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

स्कूल-आंगनबाड़ी जमीनों पर भी निर्माण

पुराने भोपाल से लेकर नए भोपाल तक यह खेल फैला है। इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में भी कई ढांचों का निर्माण हो चुका है। भोपाल में भेल के पास बड़ा लैंडबैंक है, जिसमें कई स्थानों पर निर्माण हो चुका है, कुछ पर जारी है। नए भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में तो भोपाल विकास प्राधिकरण द्वारा कॉलोनी निर्माण के दौरान स्कूल व आंगनबाड़ी के लिए छोड़ी जमीन पर ही इन ढांचों का निर्माण शुरू कर दिया गया।

जमीन हथियाने की प्रतिस्पर्धा

भोपाल के कई इलाकों में जमीने हथियाने की मानो प्रतिस्पर्धा चल रही है। नाम न छापने की शर्त पर लोगों का कहना है कि नए भोपाल की एक कॉलोनी में कुछ लोगों ने एक धार्मिक ढांचा बनाया था, जिसे देखकर अन्य चार समूहों ने अलग-अलग स्थानों पर जमीनें घेर लीं।

ली जा रही हरियाली की बलि

जमीन हथियाने वाले गिरोह को हरियाली से भी सरोकार नहीं रहा। ये हरियाली के भी दुश्मन बन गए हैं। भोपाल में मुख्य सड़कों के दोनों किनारों पर 15 से 25 फीट जगह ग्रीन वेल्ट के लिए आरक्षित है। यह हिस्सा तार फेसिंग से कवर्ड किया गया था। शुरुआत में लगा पौधे पेड़ बन गए और अच्छी-खासी हरियाली भी तैयार हो गई थी, लेकिन एम्स के सामने बरखखेड़ा जाने वाले मार्ग पर, स्वामी विवेकानंद परिसर के सामने 11 मील बायपास पर जाने वाले मार्ग पर और 10 नंबर मार्केट क्षेत्र में कई जगह पेड़ काटकर निर्माण किया गया। यह हाल अकेले भोपाल का नहीं, बल्कि लगभग हर शहर में कमोवेश यही स्थिति पैदा हो रही है।

कलेक्टर, एसडीएम से लेकर तहसीलदारों तक ने साधी चुप्पी

चिंता वाली बात यह है कि इस तरह हथियाई जा रही सरकारी जमीन को बचाने वाले जिलों के कलेक्टर, क्षेत्र के एसडीएम व तहसीलदारों ने चुप्पी साध रखी है। जमीन हथियाने वाले गिरोह के आगे कोई बोलने को तैयार ही नहीं है।

लोग जनप्रतिनिधियों से नाराज

शहरी क्षेत्रों में हड़पी जा रही जमीनों के लिए स्थानीय निकाय और ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे कब्जों के लिए राजस्व का अमला भी जिम्मेदार है। जब अधिकारियों से इस मुद्दे पर बात की गई तो उनका कहना था कि इन अतिक्रमण को अंदरूनी तौर पर राजनीतिक संरक्षण है, क्योंकि जब भी ऐसे कब्जों को हटाने को बारी आई, तब राजनीतिक दबाव सामने आए और शुरू करने से पहले ही कार्रवाई रोकनी पड़ी। सरकारी जमीनों की बंदरबांट कराने वाले जनप्रतिनिधियों से लोग भी नाराज हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि किसी भी शहर के लिए खाली लैंडबैंक और उसी पर हरियाली का होना जरूरी है, जो कब्जों के कारण बर्बाद हो रही है। प्रकृति प्रेमियों की मांग है कि जनप्रतिनिधियों ने इन अवैध कामों को संरक्षण दिया तो चुनावों में याद रखेंगे।

Updated on:
06 Oct 2026 09:15 am
Published on:
06 Oct 2026 09:15 am