
Bhopal news:मध्यप्रदेश में अब सरकार रजिस्ट्री के साथ लगने वाले किसी भी विभाग से संबंधित सेस या उपकर में छूट दे सकेगी। इसके लिए अब विभागों की अनुमति की जरूरत नहीं होगी। सरकार एक अधिसूचना जारी कर संबंधित दस्तावेजों पर सेस से छूट दे सकेगी। इसके लिए विधानसभा पारित उपकर संशोधन अधिनियम 2025 को राज्यपाल की मंजूरी मिल गई है। इसके लागू होने के साथ इसके लिए पहले सरकार द्वारा लागू किया गया अध्यादेश निरस्त हो गया है। सरकार ने यह प्रावधान खासतौर पर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए किया है।
उपकर से छूट का अब उद्योगों को भी लाभ मिल सकेगा। क्योंकि कई बड़े निवेशकों को सरकार जमीन, लीज, रजिस्ट्री सहित अन्य करों छूट देती है। सरकार के साथ हुए समझौते या एमओयू के तहत निवेशकों को सरकार सेस या उपकर से सीधे छूट दे सकेगी। इससे उद्योगों को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। वहीं प्रदेश में आने वाले निवेशकों को भी सुविधाएं दी जा सकेंगी।
बता दें कि उपकर संशोधन की जरूरत उस समय महसूस की गई जब 13 मार्च को कैबिनेट ने स्वामित्व योजना को मंजूरी दी थी। योजना के तहत प्रदेश में 46 लाख लोग चिह्नित हुए जिनके पास स्वामित्व संबंधी कोई दस्तावेज नहीं हैं। तब राज्य सरकार ने संपत्ति की निःशुल्क रजिस्ट्री का निर्णय लिया। इस पर करीब 3000 करोड़ का खर्च आएगा। लेकिन रजिस्ट्री परं ग्रामीण विकास और नगरीय विभाग का सेस भी लगता है। इससे खर्च और बढ़ रहा था। इसे देखते हुए इन सेस से छूट देने का फैसला लिया गया। गया। लेकिन छूट के लिए सरकार को संबंधित विभागों को आदेश जारी करने पड़े।
बता दें कि रजिस्ट्री एक कानूनी प्रक्रिया है जिसके जरिए किसी संपत्ति (जैसे ज़मीन, मकान या दुकान) का मालिकाना हक एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर किया जाता है। इसे 'सेल डीड' (Sale Deed) या विक्रय विलेख भी कहा जाता है, जिसे सरकारी उप-पंजीयक (Sub-Registrar) के कार्यालय में दर्ज किया जाता है। जब आप किसी संपत्ति की रजिस्ट्री करवाते हैं, तभी आप उसके आधिकारिक मालिक बनते हैं।
इसमें खरीदार, विक्रेता, संपत्ति का पूरा विवरण और तय की गई कीमत लिखी होती है।