TET- शिक्षक पात्रता परीक्षा से नाराज हैं शिक्षक, लोक शिक्षण संचालनालय हुआ सक्रिय
TET- शिक्षक पात्रता परीक्षा यानि TET की अनिवार्यता पर प्रदेशभर के शिक्षकों में रोष है। राज्य के डेढ़ लाख शिक्षक इससे प्रभावित हो रहे हैं। कई शिक्षकों को अपनी नौकरी पर खतरा मंडराता दिख रहे है जिससे वे परेशान हो उठे हैं। अब टीचर्स की यह दिक्कत दूर करने लोक शिक्षण संचालनालय सक्रिय हुआ है। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने इस संबंध में अधिकारियोें और शिक्षक प्रतिनिधियों की साझा बैठक बुलाई।प्रदेश के टीचर्स के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा TET के संबंध में अब नया आदेश निकाला जाएगा। कुछ शिक्षकों को इससे छूट मिल सकती है। किनके लिए टीईटी अनिवार्य होगी और किन्हें इससे छूट मिलेगी, नए आदेश में इसकी स्थिति स्पष्ट की जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय और शिक्षा विभाग द्वारा अधिकारियों को इसके लिए निर्देश दे दिए गए हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका के लिए भी कवायद चल रही है।
यदि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा परीक्षा संबंधी निर्देश यथावत रखे जाते हैं तो शिक्षकों के लिए तहसील एवं विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण एवं सिलेबस आधारित मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे
टीईटी परीक्षा से संबंधित प्रकरण में शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को पूर्ण सहयोग प्रदान करने का भरोसा दिलाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा परीक्षा संबंधी निर्देश यथावत रखे जाते हैं तो परीक्षा में सम्मिलित होने वाले शिक्षकों के लिए तहसील एवं विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण एवं सिलेबस आधारित मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे शिक्षकों को परीक्षा की तैयारी करने में सुविधा होगी।
लोक शिक्षण संचालनालय ने शिक्षकों की टीईटी परीक्षा के संबंध में एक स्पष्ट एवं सुव्यवस्थित आदेश शीघ्र जारी करने का निर्णय लिया है। इसमें यह वर्गीकृत एवं सरलीकृत रूप में निर्धारित किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए परीक्षा अनिवार्य होगी तथा किन्हें नियमानुसार छूट अथवा सरलीकरण प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार नए आदेश में टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता और छूट की स्थिति पूर्णत: स्पष्ट हो जाएगी।
शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में प्रदेश शासन द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण के संदर्भ में शासकीय अधिवक्ता से अभिमत प्राप्त करने की कार्यवाही प्रगति पर है। अभिमत प्राप्त होते ही आवश्यकतानुसार सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्याचिका प्रस्तुत की जाएगी।