MP News: भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल (IISER Bhopal) में जैविक विज्ञान विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिके नाम से छात्राओं को अश्लील संदेश भेजे गए। हाईकोर्ट ने मामले में बड़ा आदेश दिया।
MP News: भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER Bhopal) में जैविक विज्ञान विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर. महालक्ष्मी (Dr. R. Mahalakshmi) पर 2024 के अंत में गंभीर आरोप लगे, जिनमें कहा गया कि उनके नाम से फर्जी ई-मेल आईडी से कुछ छात्राओं को अश्लील और आपत्तिजनक संदेश भेजे गए।
इन ई-मेल में यह भी लिखा गया था कि पीएचडी में प्रवेश के लिए 'शारीरिक शोषण आवश्यक' है, जो छात्राओं और प्रोफेसरों के बीच सनसनी का विषय बन गया। इसके बाद 7 दिसंबर 2024 को प्रभावित छात्राओं ने संबंधित प्रोफेसरों को सूचित किया और उसके बाद खजूरी सड़क थाने में शिकायत दर्ज कराई गई और मामला साइबर क्राइम सेल को सौंपा गया। प्रारंभिक जांच में उन ई-मेल आईडी को फर्जी पाया गया।
आंतरिक जांच के लिए संस्थान ने विभागीय समिति गठित की और साथ ही पूर्व न्यायाधीश अभय सक्सेना से स्वतंत्र जांच कराई गई। उनके प्रस्तुता रिपोर्ट के बाद मामला बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) की बैठक में आया, जिसमें निर्णय लिया गया कि डॉ. महालक्ष्मी की सेवाएं समाप्त की जाएं। इस आधार पर उन्हें पद से बर्खास्त किया गया।
डॉ. महालक्ष्मी ने इस कार्रवाई के खिलाफ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने निलंबन अवधि के विस्तार और जांच प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को चुनौती दी। न्यायालय ने पाया कि निलंबन का विस्तार बिना समीक्षा समिति की सिफारिश के किया गया और इसलिए वह आदेश विधिक रूप से कमजोर था। कोर्ट ने निलंबन आदेश को रद्द करते हुए कहा कि अभी तक कोई ठोस दोषी निर्णय नहीं है और उन्हें सेवा में पुनर्स्थापित होने का अवसर दिया जा सकता है।
इस मामले ने शैक्षणिक संस्थानों में साइबर सतर्कता, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत और अनुशासनात्मक जांच की आवश्यकता पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है, खासकर तब जब आरोपों में सोशल मीडिया और फर्जी डिजिटल पहचान का उपयोग हुआ हो। (MP News)