MP News: पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा ने बताया, छात्र रैगिंग की शिकायत टोल फ्री नंबर 1800-180-5522 पर कर सकते हैं।
MP News: अपराध और आपात स्थितियों से निपटने के लिए हाई-टेक पुलिसिंग की दिशा में भोपाल पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। अब नेशनल एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन और बैंकों के अलार्म सिस्टम से आने वाली सूचना सीधे पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचेगी। नई व्यवस्था से पुलिस तुरंत हरकत में आएगी और तुरंत कार्रवाई करने का मौका मिलेगा।
इसी तर्ज पर यह सिस्टम अब बैंकों में भी लागू किया गया है। किसी भी बैंक के अंदर अलार्म बजते ही पुलिस कमिश्नर व वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे सूचना मिलती है। इससे पुलिस मौके पर अपराधियों के वारदात को अंजाम देने से पहले ही पहुंचकर हालात को काबू कर लेती है। तकनीक से बैंक लूट जैसी घटनाओं को भी रोकने में मदद मिली है।
पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा ने बताया, छात्र रैगिंग की शिकायत टोल फ्री नंबर 1800-180-5522 पर कर सकते हैं। इस एडवांस्ड कनेक्टिविटी सिस्टम से कंट्रोल रूम द्वारा हेल्पलाइन और अलार्म पॉइंट से आने वाली जानकारी सीधे वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचती है। इससे पुलिस की प्रतिक्रिया तेज होती है और लापरवाही की आशंका खत्म हो जाती है। इस तकनीक से हमने आत्महत्या की घटनाओं को भी समय रहते रोकने और बैंक डकैती को विफल करने में सफलता मिली है।
छात्र रैगिंग की शिकायत यूजीसी के टोल फ्री नंबर 1800-180-5522 पर कर सकते हैं। साथ ही विश्वविद्यालयों में एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्यों की सूची और संपर्क नंबर विभागों के बाहर लगाए गए हैं। छात्र-छात्राओं इन नंबरों पर भी सूचित कर सकते हैं। सूचना देते ही शिकायत सीधे पुलिस तक पहुंचेगी।
तकनीक हाई टेक होने से स्मार्ट तर्ज पर शहर की पुलिस काम करना शुरू कर दी है। इस सिस्टम से आने वाली सूचनाओं पर गंभीरता से काम किया जाता है। चाहे वो रैगिंग से जुड़ा मामला हो या फिर बैंक डकैती से जुड़ा क्यों न हो। - हरिनारायण चारी मिश्रा, पुलिस कमिश्नर, भोपाल
पुलिस कमिश्नर ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार, हाल ही में एक कॉलेज छात्र ने देर रात एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर फोन कर मदद मांगी। यह अलर्ट तुरंत पुलिस कमिश्नर के डैश बोर्ड तक पहुंचा था। निर्देश मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। इसके बाद छात्र की समस्या सुनी और मौके पर ही बिना देर किए हल किया गया। पुलिस का कहना है कि इस नई व्यवस्था से रैगिंग और उत्पीड़न जैसी शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई होगी और इस तरह के मामलों में गिरावट भी आएगी।