
MP Political War- मध्यप्रदेश प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और कांग्रेस पर हाल ही में सीएम मोहन यादव ने 'पप्पू का चप्पू' कहकर तंज कसा था, इस पर जीतू पटवारी की भी मुस्कुराती हुई प्रतिक्रिया सामने आई है। जीतू पटवारी ने कहा है कि मैं उन्हें इसके लिए धन्यवाद देता हूं।
जीतू पटवारी शुक्रवार को मीडिया से बात कर रहे थे। जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव की उस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने 'पप्पू और चप्पू' बोलकर तंज कसा था।
मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी (jitu patwari) ने कहा कि जीतू पटवारी कोई आम व्यक्ति नहीं है, वह विपक्षी पार्टी में एक जिम्मेदार पद पर है। मुख्यमंत्री से मेरी कोई निजी दुश्मनी नहीं है। मैं अपना काम कर रहा हूं और उन्हें अपना काम करना चाहिए।
जीतू पटवारी ने कहा कि अगर वह मुझे अनपढ़, दो कौड़ी का या कुछ और कहते हैं, तो मैं इसके लिए उन्हें धन्यवाद देता हूँ। अगर वह मुझे 'पप्पू का चप्पू' कहते हैं, तो उसके लिए भी मैं उन्हें धन्यवाद देता हूँ। चप्पू नाव को आगे बढ़ाता है, उसे नदी पार करने में मदद करता है और किनारे तक ले जाता है। यही उसका काम है। मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि चप्पू भी काम का होता है। जहाँ तक मुख्यमंत्री की बात है, तो मैं फिर से यही कहूँगा कि उन्हें अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभानी चाहिए…."
मुख्यमंत्री मोहन यादव बुधवार को उज्जैन जिले के महिदपुर में थे। एक सभा को संबोधित करते हुए मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला था। महिदपुर में 207 करोड़ की सौगातें देते हुए उन्होने कहा था कि पप्पू और पप्पू को चलाने वाले चप्पू, सब एक ही लाइन में खड़े हैं। पार्टी की कमान नौसिखियों को सौंप दी गई है। यदि कोई गाड़ी आगे बढ़ाने की बजाय पीछे ठोंक दे तो उसमें हमारा क्या दोष है। कांग्रेस अपने कर्मों की सजा भुगत रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अब लाडली बहना योजना से जब सरकार कार्यकर रही है तो कांग्रेस नेता अनर्गल बयान दे रहे हैं। उन्हें शर्म आनी चाहिए।
इसी दिन बुधवार को ग्वालियर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार और भाजपा पर तीखा हमला करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। जीतू ने कहा था कि प्रदेश में 'अलीबाबा और चालीस चोरों की सरकार' है। जिसमें भ्रष्टाचार संस्थागत रूप ले चुका है। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। पटवारी ने दावा किया कि राज्य में ट्रांसफर उद्योग चरम पर है और वर्तमान 20 हजार कर्मचारियों के तबादलों में 200 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है।