
Salary : दिवाली का महापर्व नजदीक है, लेकिन मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को वेतन का इंतजार है। आदिम जाति कल्याण विभाग में यह स्थिति बनी है। यहां बजट उपलब्ध नहीं होने से सेलरी अटक गई। कई जिलों में वेतन भुगतान अटका है। ऐसे में कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है। मध्यप्रदेश लघु वेतन कर्मचारी संघ ने इस मामले को लेकर सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है। इसे लेकर कर्मचारी भवन, गीतांजलि चौराहा में संघ की केंद्रीय प्रबंध समिति और विभागीय समितियों की बैठक बुलाई गई जिसमें समस्याओं पर चर्चा कर आंदोलन की रणनीति तय की गई।
आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत काम करने वाले चतुर्थ श्रेणी, दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारियों के सामने इस बार दिवाली पर वेतन का संकट खड़ा हो गया है। वेतन मद में बजट उपलब्ध नहीं होने से कई जिलों में कर्मचारियों का भुगतान अटका हुआ है।
मध्यप्रदेश लघु वेतन कर्मचारी संघ ने मामले में तत्काल निर्णय की मांग की है। संघ की प्रमुख मांग है कि आदिम जाति कल्याण विभाग के जिलों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन के लिए तत्काल बजट जारी किया जाए, ताकि दिवाली से पहले भुगतान सुनिश्चित हो सके।
बैठक में पांच लाख पेंशनरों को भी जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता का लाभ देने की मांग उठाई गई। संघ का कहना है कि प्रदेश के कर्मचारियों को जनवरी से स्वीकृत महंगाई भत्ता का लाभ दिया गया, जबकि पेंशनरों को जुलाई से इसका लाभ दिया गया है। ऐसे में पेंशनरों को इसका पूरा लाभ दिया जाए।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर शासन द्वारा दिवाली से पहले इन मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया गया तो प्रदर्शन करेंगे। 13 नवंबर को दोपहर 1 से 3 बजे तक सतपुड़ा भवन के समक्ष एकत्रित होकर प्रदर्शन किया जाएगा।
श्रम विभाग द्वारा समय पर वेतन भुगतान करने के कड़े निर्देश हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनपर अमल नहीं किया जा रहा है। त्योहारों से पहले अनिवार्य रूप से वेतन भुगतान के निर्देश के बाद भी कर्मचारी वेतन के लिए तरस रहे हैं। प्रदेश के कुछ अन्य विभागों में भी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के ढुलमुल रवैए के कारण कर्मचारियों को वेतन देने के आदेशों पर ठीक से पालन नहीं हो पा रहा है।