Lokayukta Raid: सेप सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी के इंजीनियरों से पूछताछ, अपर आयुक्त पर लगे आरोपों के साक्ष्य हो रहे तैयार
Lokayukt Raids: नगर निगम में फर्जी तरीके से बिल बनाकर भुगतान करने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने एक दिन में अलग-अलग दफ्तरों पर छापामार कार्रवाई की। निगम गैराज, सीवेज, सिविल, तालाब संरक्षण सहित अन्य विभाग के ताले खुलवाकर कर्मचारियों को बुलाया गया। सुबह 11:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक 6 घंटे से ज्यादा वक्त तक यह सर्चिंग जारी रही।
राजधानी भोपाल में लोकायुक्त पुलिस ने अलग-अलग विभागों की 200 से ज्यादा फाइल बोरों में भरकर बरामद की हैं। इन फाइल में परचेस ऑर्डर का जिक्र किया गया था जिसका मिलान अब नगर निगम की आर्थिक व्यवस्था संभालने वाले सेप सॉफ्टवेयर के डेटा रिकॉर्ड से किया जाएगा। टीम ने निगम सेप सॉफ्टवेयर बनाने वाली ई- कॉमर्स कंपनी के इंजीनियरों को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच में यह देखा जा रहा है कि जो आर्डर भौतिक रूप से तैयार किए गए थे, उन्हें सॉफ्टवेयर के जरिए निगम की बैलेंस शीट में दर्ज किया गया या नहीं। 2020 से लेकर अभी तक नगर निगम में जितने भी कार्य किए गए हैं, उन्हें जांच के दायरे में लिया गया है।
नगर निगम के पूर्व अपर आयुक्त फाइनेंस गुणवंत सेवतकर को पद से हटाकर मुकेश शर्मा को नया एडीसी वित्त बनाया गया है। सेवतकर के खिलाफ लोकायुक्त संगठन ने धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज तैयार करने सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर ने बताया की सेवतकर के खिलाफ फर्जी तरीके से बिल मंजूर कर भुगतान करवाने के तथ्य जांच में मिले हैं। उनकी संपत्ति को फिलहाल जांच के दायरे में नहीं लिया गया है। जरूरत पडऩे पर उनके द्वारा अर्जित संपत्ति की जांच भी की जा सकती है। लोकायुक्त संगठन ने स्पष्ट किया है कि सात साल के दौरान नगर निगम की अलग-अलग शाखाओं में जितने भी विभाग प्रमुख पदस्थ हुए हैं उन सभी से इस मामले में पूछताछ की जाएगी।