
MP News:मध्यप्रदेश में सरकारी आवास योजना में बने आवासों में रह रहे 2 लाख से अधिक लोगों के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना समेत अन्य योजनाओं के तहत ज्यादातर निर्माण नगर निगम ने किए। कुछ को भोपाल और इंदौर विकास प्राधिकरणों ने बनाया। लेकिन इसके लिए निर्माण एजेंसियों ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) से जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) ही नहीं ली।
इनमें बिना ईसी बने भोपाल के 16 सरकारी प्रोजेक्ट हैं। नियमानुसार, 20 हजार वर्ग फीट या अधिक के आवासीय प्रोजेक्ट के लिए यह जरूरी है। अब इसी अनदेखी पर पर्यावरण मामलों के जानकार नितिन सक्सेना समेत अन्य पक्षों ने भोपाल से दिल्ली तक शिकायत की है।
भोपाल में नगर निगम ने हाउसिंग फॉर ऑल के तहत 18 प्रोजेक्ट अपने हाथ में लिए। कुछ भोपाल विकास प्राधिकरणों ने रखे। निगम के राहुल नगर वाले प्रोजेक्ट को छोड़कर बाकी के किसी प्रोजेक्ट में ईसी नहीं ली गई। यानी, 17 प्रोजेक्ट में ईसी ही नहीं ली।
बिना ईसी वाले प्रोजेक्टों से भारी जुर्माना वसूलने के साथ ही इन्हें तोड़ने तक के नियम हैं। ऐसे में रहवासियों के लिए नई चुनौती खड़ी हो जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि जुर्माना कौन भरेगा। इसके साथ ही ईसी नहीं लिए जाने से इन प्रोजेक्टों में ठीक से सीवेज प्रबंधंन तक नहीं किया गया है। इससे आसपास गंदगी फैल रही है। कटारा हिल्स क्षेत्र के घरौंदा आवासीय परिसर का सीवेज तो नहर में बह रहा है। इससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
नियम का पालन अफसरों को करना होता है। लेकिन आवासीय योजना के प्रोजेक्टों में जिम्मेदारों ने अनदेखा किया, उसे संबंधित एजेंसियों व उपक्रमों ने नहीं रोका। कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट जाऊंगा। -नितिन सक्सेना, पर्यावरण
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) भारत सरकार की एक बड़ी योजना है। इसकी शुरुआत 25 जून 2015 को हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश के गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बुनियादी सुविधाओं (बिजली, पानी, शौचालय) से युक्त अपना पक्का घर उपलब्ध कराना है। ग्रामीण इलाकों में कच्चे या टूटे-फूटे घरों में रहने वाले गरीब परिवारों के लिए है ।मैदानी इलाकों में घर बनाने के लिए 1.20 लाख और पहाड़ी या कठिन क्षेत्रों में 1.30 लाख की आर्थिक सहायता मिलती है।