
Kailash Vijayvargiya: दीपावली के पहले मोहन सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए 23,300 करोड़ रुपए के कामों को स्वीकृति दी। ये काम अगले 5 साल में कराए जाएंगे। इसमें 700 करोड़ रुपए केवल नगरीय विकास विभाग की योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए दिए गए। लेकिन मंगलवार को भोपाल में आयोजित कैबिनेट की बैठक (MP Cabinet Meeting) में विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपनी ही सरकार के खिलाफ प्रखर हुए।
सूत्रों के अनुसार, विजयवर्गीय बैठक में वर्चुअली जुड़े और कहा, मैं प्रदेश के नगरीय निकायों में जाता हूं, लोग कामों की अपेक्षा करते हैं, कई बार घोषणाएं करनी पड़ती हैं, जब कर देता हूं तो उन्हें पूरा करने के लिए राशि नहीं मिलती, अब ऐसे में काम कैसे पूरे करूं। सूत्रों के अनुसार, विजयवर्गीय की इस बात पर कैबिनेट में सन्नाटा छा गया। बता दें, मंत्री कैलाश लगातार अपनी ही सरकार के कार्यों से असंतुष्ट दिख रहे हैं। हाल में इंदौर में हुई भाजपा की लोकतंत्र बचाओ रैली में मंच से एक नागरिक के लिए अपशब्द कहे। फिर इंदौर दूषित जलकांड को लेकर सवाल पर भी आपत्तिजनक बयान दिए। इससे दोनों ही बार सत्ता व संगठन पर सवाल उठे थे।
बता दें कि, यह पहली बार नहीं है जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय राजधानी में हो रही किसी सरकारी या पार्टी की अहम बैठकों में शामिल नहीं हुए थे। इससे पहले भी साल 2024, 2025 और 2026 में कई बार कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं हुए है। अगर शामिल हुए भी तो वीसी के जरिए। यहीं नहीं, अक्टूबर माह में एमपी भाजपा कोर कमिटी की दो बैठकों में भी कैलाश विजयवर्गीय उपस्थित नहीं थे। महत्वपूर्ण बैठकों के उनकी गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े किए थे।
30 अक्टूबर को इंदौर में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के दौरान भी विजयवर्गीय की जबान एक बार फिर फिसली। लोकतंत्र बचाने की बात करने वाली मंत्रीजी को समाजसेवी प्रहलाद पाण्डेय का नगरीय निकायों में खरीदी घोटाले का पोस्टर का नागवार गुजरा। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के कहने पर उन्हें हिरासत में ले लिया। वे पूछते रहे कि मेरा अपराध क्या है… क्या सवाल पूछना अपराध है? पुलिस ने एक न सुनी और उन्हें कार्यक्रम स्थल से गाड़ी में बैठाकर ले गए। मंत्री कैलाश यहीं नहीं रुके। उन्होंने मंच से समाजसेवी को अपशब्द कहना शुरू कर दिया। मंत्री बोले इतने जूते खाने के बाद भी आ गया। इसे गाड़ी में बैठाओ।