
MP Electricity Bill: मध्य प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियों के लिए 2123 करोड़ रुपए का बकाया बिजली बिल सिरदर्द बन गया है। कंपनियां बार-बार कोशिश कर रही हैं, लेकिन वसूली नहीं कर पा रहीं। यह वसूली पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, गृह, महिला, स्कूल शिक्षा, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन जैसे 20 से ज्यादा बड़े विभागों से करनी है। इस बकाये में बीते 10 से 15 साल पुरानी राशि भी है, जो जमा नहीं की जा रही। चक्कर काट रहीं कंपनियां, उलझनें भी कंपनियां वसूली करने के लिए आए दिन चक्कर काट रही हैं, लेकिन विभाग प्रमुख राशि देने को तैयार नहीं हैं।
इनमें से कुछ विभाग और बिजली कंपनियों के बीच तो कानूनी उलझन भी पैदा हो चुकी है। नतीजन बिजली वितरण कंपनियां उक्त राशि के कारण हो रहे नुकसान को हर साल होने वाले घाटे में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष शामिल कर रही हैं। इसी नुकसान को आधार बनाकर हर साल बिजली महंगी करवा लेती हैं। इसका असर प्रदेश के लगभग पौने 2 करोड़ आम और खास उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
1- विभागों को राशि चुकानी पड़ेगी। जब तक इसका निराकरण नहीं होगा, कंपनियां इसे घाटे में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल करेंगी।
2- चूंकि विभागों ने भी बिजली का उपयोग कहीं न कहीं जनता को सुविधा देने या जनता के काम करने में ही किया है, इसलिए सरकार चाहे तो कंपनियों को अपनी ओर से इसकी भरपाई कर सकती है।
स्मार्ट मीटर (MP electricity bill of smart meter) लगने के बाद बिल बढ़ने की शिकायतें आ रही हैं। दूसरा पहलू यह है कि बिल बकाया होने या डेट निकलने पर ऑनलाइन ही कनेतशन काट दिया जाता है, जबकि विभागों के साथ ऐसा नहीं है।
बिजली बिलों की वसूली (MP Electricity bill Expensive) संबंधी यह विषय हाल के दिनों में मुख्यमंत्री के सामने भी पेश किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक ऊर्जा विभाग ने मुख्यमंत्री के सामने एक प्रेजेंटेशन दिया था, जिसमें विभागों से वसूली योग्य राशि की जानकारी भी दी थी। तब मुख्यमंत्री ने कहा था कि कंपनियों को वसूली के लिए नए सिरे से प्रयास करने चाहिए, विभागों को जलाई गई बिजली के बदले बिल की राशि जमा करनी होगी।
बिजली कंपनियों (MP Electricity Consumers)का दोहरा रवैया भी सामने आता रहता है। कंपनियों के कई अधिकारी विभागों से बकाया बिजली बिल वसूलने में पीछे हट रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर नोटिसनोटिस खेल रहे हैं। वसूली नहीं चुकाने वाले छोटे उपभोक्ताओं की बिजली काट दी जाती है। जोड़ने के नाम पर 200 रुपए शुल्क लेते हैं। जिनके यहां स्मार्ट मीटर लगे तो वहां तकनीकी रूप से ऑनलाइन ही कनेक्शन काट दिया जाता है। आमतौर पर इस तरह की कार्रवाई विभागों, उनसे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ नहीं की जाती।
विभाग - कनेक्शन- बकाया
पंचायत एवं ग्रामीण विकास-- 86593 - 1230
नगरीय विकास एवं आवास - 41424 - 264
नर्मदा घाटी विकास - 664 - 178
महिला एवं बाल विकास - 42887 - 88
स्कूल शिक्षा - 57652 - 84
स्वास्थ्य - 8026 - 43
जल संसाधन - 1291 - 40
जनजातीय कार्य - 23309 - 35
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी - 1333 - 25
गृह - 5901 - 16
नोट- (यह राशि करोड़ रुपए में है)
पूर्व क्षेत्र - 687
मध्य क्षेत्र - 2123
पश्चिम क्षेत्र - 820
कुल बकाया 2123 करोड़ रुपए
कंपनी - लक्ष्य 2025 - वसूली% - लक्ष्य 2026 - वसूली%
पूर्व- 10480 - 83.3 - 11392 - 82
मध्य - 11441 - 79.2 - 12762 - 80.8
पश्चिम - 12591 - 98.9 - 13914 - 97