Cashless Health Scheme- कर्मचारियों के वेतन से 250 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक के 4 स्लैब में राशि काटना प्रस्तावित
Cashless Health Scheme - मध्यप्रदेश में सरकारी अमले के लिए बड़ी स्वास्थ्य योजना बनाई जा रही है। राज्य सरकार कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए कैशलेस हेल्थ स्कीम बना रही है। प्रदेश का सामान्य प्रशासन विभाग और स्वास्थ्य विभाग इसकी तैयारी में लगा है। कैशलेस हेल्थ स्कीम के लिए कर्मचारी संगठनों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं। योजना में कर्मचारियों के वेतन से न्यूनतम 250 रुपए से लेकर अधिकतम 1000 रुपए तक के 4 स्लैब में राशि काटना प्रस्तावित है। शेष राशि सरकार द्वारा देय रहेगी। कैशलेस हेल्थ स्कीम में गंभीर रोगों में 10 लाख रुपए तक का इलाज किया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के प्रमुख अस्पताल भी तलाशे जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए मुख्यमंत्री कर्मचारी एवं पेंशनर्स व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम से स्कीम बनाई जा रही है। करीब 6 साल पहले कांग्रेस सरकार के दौरान भी स्कीम लागू करने की कोशिश की गई थी। इसका ड्राफ्ट भी तैयार हो चुका था पर योजना को अंजाम नहीं दिया जा सका।
सामान्य प्रशासन विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने योजना की कवायद चालू कर दी है। जीएडी के अपर सचिव दिनेश कुमार मौर्य और स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम ने कर्मचारी संगठनों की बैठक बुलाई। अधिकारियों ने उनसे कैशलेस हेल्थ स्कीम Cashless Health Scheme पर सुझाव मांगे।
बताया गया है कि स्कीम में कर्मचारियों के वेतन से 250 रुपए, 500 रुपए,750 रुपए और 1000 काटे जाने हैं। इन 4 स्लैब पर सुझाव मांगे गए हैं। इसके लिए एक वॉट्सऐप नंबर भी जारी किया गया है। कर्मचारियों और संगठनों के सुझाव के आधार पर स्कीम का फाइनल ड्राफ्ट बनाया जाएगा।
बैठक में शामिल कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित कैशलेस हेल्थ स्कीम Cashless Health Scheme कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। इसके अंतर्गत सरकार द्वारा चिह्नित अस्पतालों में सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों का इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा। सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख रुपए तक का और गंभीर रोगों में 10 लाख रुपए तक का इलाज किया जा सकेगा। योजना में 10000 रुपए तक की ओपीडी और दवाइयां भी कवर की जाएंगी। कर्मचारियों, पेंशनर्स से मासिक 250 रुपए से लेकर 1000 तक लिए जाएंगे जबकि शेष राशि सरकार देगी।