mp news: लंबित ई-एफआईआर पर चार दिनों में 56 केस दर्ज, 2.25 करोड़ की ठगी, केंद्र के निर्देश के बाद पुराने साइबर फ्रॉड मामलों में तेजी, जांच पर उठे सवाल।
सुमित यादव
mp news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में महीनों से लंबित साइबर ठगी की शिकायतों पर अब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जांच तेज कर दी है। हाल ही में गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साइबर अपराध के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद शहर के अलग-अलग थानों में पिछले चार दिनों में कुल 56 से अधिक साइबर ठगी के मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में करीब 2.25 करोड़ रुपये अधिक ठगी का खुलासा हुआ है। वहीं शुक्रवार को बैरागढ़ थाना में दर्ज केस में खुलासा हुआ है कि शेयर मार्केट में खाता खोलने के नाम पर अस्मत अली से 14 लाख 85 हजार रुपये की ठगी हुई है।
पुलिस से मिली जानकारी अनुसार ये शिकायतें कई महीनों से लंबित थी, लेकिन इन्हें थाने स्तर पर नियमित एफआईआर में दर्ज नहीं किया गया था। कुछ मामले तो छह महीने पुराने बताए जा रहे हैं। इन सभी मामलों में ठगों ने अलग-अलग तरीके अपनाए जैसे कि ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग का झांसा, डिजिटल अरेस्ट और नौकरी दिलाने के नाम पर, बिजली बिल जमा करने के नाम पर ठगी कर रकम हड़प ली।
साइबर ठगी के कुछ बड़े मामलों में साइबर क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई की थी, लेकिन ज्यादातर ई-एफआईआर जो स्थानीय थानों को भेजने पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस मामले को केंद्र सरकार के सख्त रुख के बाद अब पुलिस अधिकारियों ने तेजी दिखाई है, जिससे पिछले कुछ दिनों में अचानक एफआईआर दर्ज होने की संख्या बढ़ गई है।
साइबर ठगी से परेशान एक फरियादी ने सवाल उठाया है कि महीनों बाद एफआईआर दर्ज होने से कितनी राहत मिल पाएगी। साइबर ठग अक्सर पकड़ से बचने के लिए अपने मोबाइल नंबर, सिम कार्ड, आईपी एड्रेस और बैंक खाते बदलते रहते हैं। कई मामलों में ठगी के कुछ ही दिनों बाद इस्तेमाल किए गए फोन नंबर बंद या हमेशा के लिए निष्क्रिय कर दिए जाते हैं। इसी तरह जिन बैंक खातों में ठगी की रकम जमा की जाती है, उन्हें जल्दी खाली कर बंद कर दिया जाता है। इसलिए ठगों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।