mp news: पुण्य की मुहिम: हाजी इमरान हारून के नेतृत्व में टीम ने संभाली कमान, नगर निगम से बंद प्याऊ चालू करने की मांग।
mp news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अप्रैल की तपती दोपहर और आसमान से बरसती आग ने न केवल इंसानों को बेहाल कर दिया है, बल्कि बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए भी अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। भीषण गर्मी के इस दौर में 'मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच' ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए बेजुबान परिंदों और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था की मुहिम शुरू की है। मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून के नेतृत्व में टीम के सदस्य शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों, पार्कों और सड़कों के किनारे मिट्टी के सकोरे (पात्र) बांधते और जल कुंड रखते नजर आ रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्यास से किसी भी पक्षी या जानवर की जान न जाए।
मुहिम के बारे में जानकारी देते हुए हाजी इमरान हारून ने बताया कि जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, जल स्रोत सूखते जा रहे हैं। ऐसे में इंसानों के पास तो विकल्प हैं, लेकिन पशु-पक्षी पूरी तरह हमारे ऊपर निर्भर हैं। उन्होंने कहा, यह मंच हर वर्ष गर्मियों में यह अभियान चलाता है। हमारा उद्देश्य केवल पानी पिलाना नहीं, बल्कि आम नागरिकों को जागरूक करना भी है। यदि हर व्यक्ति अपने घर की छत, बालकनी या आंगन में एक सकोरा पानी और मुट्ठी भर दाना रखे, तो हजारों बेजुबानों की जान बचाई जा सकती है।
मंच ने पशु-पक्षियों के साथ-साथ राहगीरों की प्यास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। हाजी इमरान हारून ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि शहर में जहां भी सार्वजनिक प्याऊ बंद पड़े हैं, उन्हें तत्काल दुरस्त कर आम जनता के लिए चालू किया जाए। उन्होंने नगर निगम को सुझाव दिया कि शहर के प्रमुख चौराहों और पेड़ों की छांव के नीचे स्थायी जल कुंड रखे जाने चाहिए, ताकि आवारा पशुओं को पानी के लिए भटकना न पड़े।
मंच की टीम इन दिनों भोपाल की सड़कों पर सक्रिय है। टीम न केवल नए सकोरे लगा रही है, बल्कि पहले से रखे गए कुंडों की साफ-सफाई और उनमें नियमित पानी भरने की जिम्मेदारी भी निभा रही है। हाजी हारून ने अपील की है कि यह कार्य किसी एक धर्म या वर्ग का नहीं, बल्कि मानवता का है। सेवा का यह कार्य पुण्य का सबसे बड़ा रूप है। मध्य प्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच की इस पहल को शहरवासियों द्वारा काफी सराहा जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब इंसान गर्मी से त्रस्त है, तब बेजुबानों की सुध लेना ही सच्ची 'सद्भावना' है।