24 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

bhopal news: सृष्टि की धुरी और शक्ति का आधार है नारी: अखिल भारतीय कलामंदिर की काव्य गोष्ठी संपन्न

bhopal news: 'आज की नारी का अवदान' विषय पर गूंजीं कविताएं, 30 से अधिक कवियों ने दीं प्रस्तुतियां, कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गौरीशंकर शर्मा 'गौरीश' ने की।

2 min read
Google source verification
kalamandir

poetry event women empowerment akhil bharatiya kalamandir

bhopal news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के विश्व संवाद केंद्र सभागार में 'अखिल भारतीय कलामन्दिर' संस्था द्वारा 'आज की नारी का अवदान' विषय पर ग्रीष्मकालीन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक समागम में साहित्यकारों ने नारी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों, उनके संघर्षों और राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को अपनी रचनाओं के माध्यम से रेखांकित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। सीमा हरि शर्मा ने सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गौरीशंकर शर्मा 'गौरीश' ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में निराला सृजन पीठ की निदेशक डॉ. साधना बलवटे उपस्थित रहीं।

नारी किसी की मोहताज नहीं: डॉ. साधना बलवटे

मुख्य अतिथि डॉ. साधना बलवटे ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि आज की नारी हर क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर रही है। वह अब किसी की मोहताज नहीं है, बल्कि अपनी योग्यता से स्वयं अपना मार्ग प्रशस्त कर रही है। वहीं, कार्यकारी अध्यक्ष हरिवल्लभ शर्मा 'हरि' ने आध्यात्मिक पक्ष रखते हुए कहा कि सृष्टि का संचालन करने के लिए त्रिदेवों को भी देवियों की ओर ही मुखातिब होना पड़ता है। नीदरलैंड से शामिल हुए सामवेदी ने संस्कृत और भारतीय संस्कृति में नारियों के ऐतिहासिक योगदान पर चर्चा की।

काव्य पाठ: भावनाओं और विचारों का संगम

गोष्ठी में लगभग 30 प्रबुद्ध कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया। डॉ. अनिता तिवारी के कुशल संचालन में कवियों ने नारी के विविध आयामों को छुआ। सरोज लता सोनी ने नारी को शक्ति और समृद्धि की शान बताया, तो मृदुल त्यागी ने उसे जीवन की गहराई कहा। सीमा हरि शर्मा की पंक्तियों साध कर कर्तव्य सब अधिकार अपने छोड़ती हैं, नारियां सारे जगत को टूट कर भी जोड़ती हैं ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। कविता शिरोले ने आह्वान किया कि अबला नहीं बल्कि बुराई के लिए 'बला' बन जाओ। अभिषेक जैन 'अबोध' ने राष्ट्र उत्थान के लिए नारी सम्मान को अनिवार्य बताया। रेनू श्रीवास्तव ने आधुनिक लड़कियों के बदलते स्वरूप और वक्त के साथ उनके बढ़ते कदमों पर कविता पढ़ी। डॉ. कमल किशोर दुबे और डॉ. शिव कुमार दीवान ने नारी को सृष्टि की धुरी और सृष्टा का तप-बल करार दिया।

व्यंग्य और यथार्थ का पुट

गोष्ठी में केवल महिमामंडन ही नहीं, बल्कि नारी की वर्तमान स्थिति पर कटाक्ष भी किए गए। सतीश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि निर्माण से विध्वंस तक हर जगह उपस्थिति के बाद भी नारी आज 'बेचारी' बनी हुई है। वहीं डॉ. राजेश तिवारी ने सवाल उठाया कि क्या इस सदी में भी नारी अबला ही रहेगी?

नई कार्यकारिणी का स्वागत

इस अवसर पर संस्था की नवीन कार्यकारिणी के पदाधिकारियों का हार और अंगवस्त्र पहनाकर गरिमामयी स्वागत किया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. गौरीश ने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए अपनी श्रेष्ठ रचना प्रस्तुत की, जिसकी सदन ने मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यक्रम के अंत में हरिवल्लभ शर्मा 'हरि' ने सभी आगंतुकों और कवियों के प्रति आभार व्यक्त किया।