MP News: सरकारी परियोजनाओं के लिए ली जा रही जमीन को लेकर किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। भू-अर्जन नीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
MP News: सरकारी परियोजनाओं में ली जा रही जमीन को लेकर किसानों का गुस्सा अब सरकार तक पहुंच गया है। कम मुआवजा, पुरानी गाइडलाइन और अनदेखी के आरोपों के बीच सरकार नए भू-अर्जन मॉडल (Land Acquisition) पर बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है।
सरकारी परियोजनाओं में जाने वाली जमीनों के बदले अब मध्य प्रदेश के किसानों को भी महाराष्ट्र, हरियाणा समेत अन्य राज्यों की तरह मुआवजा (Farmer Compensation) मिलेगा। अभी जमीनों का बाजार मूल्य की तुलना में कम मुआवजा दिया जा रहा है। किसान नाराज है। इसे देखते हुए सरकार मुआवजा बढ़ाने की तैयारी में है।
मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में बनाई गई प्रदेश स्तरीय समिति ने बुधवार को मंत्रालय में किसान संगठनों व उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। सुझाव मांगे और कमियों पर बात की। अन्य राज्यों में प्रभावी भू-अर्जन मॉडल और यहां मिलने वाली मुआवजा राशि पर भी बातचीत की। बैठक में मंत्री तुलसीराम सिलावट और चैतन्य काश्यप भी मौजूद थे।
बाजार मूल्य का आधा भी नहींः जो जमीनें ली जा रही हैं, उनका मुआवजा बाजार मूल्य से आधा भी नहीं होता। इसे बढ़ाना चाहिए।
औचित्यहीन गाइडलाइनः सरकारी गाइडलाइन को मुआवजा तय करने का आधार बनाया जाता है। यह कम है।
सरकारी नौकरी मिलेः कुछ संगठनों ने कहा, पहले की तरह उस परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले, जिसकी जमीन ली जा रही है।
सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन होः जिन परिवारों की पहले सरकारी परियोजनाओं में जमीनें ली गईं. उनकी वर्तमान सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन हो। पता चलेगा कि 75% परिवारों की स्थिति दयनीय है।
जमीन के बदले जमीनः कुछ ने कहा. जैसे वन विभाग की जमीन लेने पर उसे दूसरी जगह जमीन दी जाती है। वैसे ही किसानों को भी जमीन के बदले जमीन दी जाए। (MP News)